श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मधवापुर ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत बाल श्रम करवाने वाले दोषी नियोजकों को 50000 रू0 तक का जुर्माना एवं 2 वर्ष तक का कारावास के सज़ा का प्रावधान है। साथ ही नियोजकों से सर्वोच्च न्यायलय के आदेशानुसार प्रति बाल श्रमिक 20,000 रु का अतिरिक्त जुर्माने की भी वसूली की जाएगी एवं इनके द्वारा बाल श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी की दर से कम भुगतान करने के विरुद्ध 10 गुना मुआवजा के साथ दावा पत्र संबंधित न्यायालय में दायर किया जाएगा। धावादल के टीम में सिद्धार्थ कुमार श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मधवापुर, अश्विनी कुमार श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी जयनगर, श्री अभिषेक कुमार श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी पंडौल, सुश्री आकांशा कुमारी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बेनीपट्टी, श्रीमती सोनी कुमारी चाइल्ड हेल्प लाइन, सर्वों प्रयास संस्था के प्रतिनिधि हरि प्रसाद एवं ग्राम विकास युवा ट्रस्ट के संतोष कुमार शामिल थे। वित्तीय वर्ष 2025-26 मे मधुबनी जिले मे विभिन्न नियोजनो मे कार्यरत अबतक 33 बाल श्रमिको को विमुक्त कराया जा चुका है । बाल श्रमिको के विमुक्ति हेतु धावा दल का संचालन आगे भी जारी रहेगा।

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