फिल्म के पहले ही फ्रेम से, दर्शक संजय लीला भंसाली की उस कलाकारी में पूरी तरह खो गए जो उनकी फिल्मों की पहचान है। बड़े पर्दे पर दिखते शानदार नजारे, बारीकी से सजाए गए सेट्स, शाही कपड़े और रंगों का वो खूबसूरत तालमेल, सब कुछ ऐसा लग रहा था मानो कोई पेंटिंग जिंदा हो गई हो। हर सीन एक कला की तरह सामने आया, जहाँ जज्बात, परंपरा और भव्यता इस कदर मिले कि देखने वाले बस देखते रह गए। फिल्म के दिल को छू लेने वाले संगीत और कलाकारों की दमदार परफॉर्मेंस ने इस अनुभव को और भी गहरा बना दिया, जिससे यह सिर्फ एक फिल्म की स्क्रीनिंग न रहकर एक यादगार एहसास बन गई। फिल्म के खास पलों पर बजती तालियां साफ बता रही थीं कि वहां मौजूद हर शख्स इस कलाकारी का कितना बड़ा कायल हो चुका है।
संजय लीला भंसाली को आज राज कपूर, के. आसिफ और गुरु दत्त जैसे दिग्गजों की कतार में खड़ा देखा जाता है। उन्होंने अपनी फिल्मों से हमेशा यह साबित किया है कि भारतीय कहानियों को कितनी गहराई और भव्यता के साथ दिखाया जा सकता है। इन महान फिल्ममेकर्स के साथ नाम जुड़ना ही बताता है कि भंसाली आज एक 'लिविंग लीजेंड' हैं, जिनका काम बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से कहीं ऊपर है। रोम में हुई 'हम दिल दे चुके सनम' की स्क्रीनिंग ने उनकी इस विरासत पर फिर से मुहर लगा दी है। इससे एक बार फिर साफ हो गया कि भंसाली की कला सरहदों, भाषाओं और पीढ़ियों की दीवारों को तोड़ देती है और दुनिया भर के दर्शकों को अपने जादू से मंत्रमुग्ध कर देती है। अब सबकी नजरें उनकी अगली फिल्म 'लव एंड वॉर' पर हैं, जो उनके शानदार करियर का एक और बड़ा और महत्वाकांक्षी हिस्सा होने वाली है।

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