कविता : मिलता है रोजगार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 22 फ़रवरी 2026

कविता : मिलता है रोजगार

 

Diksha-bora-ganv-ki-awaz
पहाड़ों में होता है ये,

जंगलों के बीच पलता है,

लाया जाता पहाड़ियों से,

कई नई बातें इसमें ढलता है।


होता है इसका बहुत सारा भार,

पर इससे मिलता है रोजगार,

जंगलों से इसे लाया जाता,

बाहर जाकर इसे बेचा जाता।


समझा जाता है इसे

एक अच्छा साधन, एक पहचान,

इससे पहाड़ों में आता है

विकास का नया प्रमाण।


महिलाओं को भी मिलता है

इससे रोजगार का सहारा,

हो जाती हैं वे आत्मनिर्भर,

बदल जाता है जीवन सारा।


मिल जाए अगर ये रोजगार,

तो सपने होते हैं साकार,

होती है तब अपनी एक पहचान,

बढ़ता है आत्मविश्वास अपार।





दीक्षा बोरा

उम्र – 17 वर्ष

कक्षा – 11वीं

रा. इ. का. मैगडी स्टेट

गरुड़, उत्तराखंड

टीम, गाँव की आवाज़

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