उन्होंने कॉम्पइलेक जैसे विशेष कंपोनेंट सोर्सिंग शो की सराहना करते हुए कहा कि 150 से अधिक खरीदारों का प्रदर्शकों से वन-ऑन-वन संवाद उद्योग को नई ऊर्जा देगा। ईमा के अध्यक्ष विक्रम गंडोत्रा ने कहा, “हमारे 1,100 से अधिक सदस्य देश की प्रगति के वाहक रहे हैं। आज हम 75 बिलियन डॉलर के उद्योग हैं, जिसमें 13.5 बिलियन डॉलर का निर्यात शामिल है, और 2030 तक 130 बिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें सप्लाई टाइमलाइन का सख्ती से पालन करते हुए घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को और सुदृढ़ करना होगा।”
वहीं मेंटर शशि अमीन ने बाजार की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा “अगले पांच वर्षों में बाजार के दोगुना होने की उम्मीद है। इस बार हमने परिणाम-आधारित इकोसिस्टम पर फोकस किया है, जहां विशेष सिस्टम निर्माताओं को सीधे डेवलपर्स, कंसल्टेंट्स और कॉन्ट्रैक्टर्स से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। हमारा उद्देश्य केवल उत्पाद प्रदर्शन नहीं, बल्कि ठोस व्यावसायिक वृद्धि सुनिश्चित करना है।” मुंबई में आयोजित यह प्रदर्शनी भारत के इलेक्ट्रिकल और कंपोनेंट्स निर्माण क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो 2030 तक 130 बिलियन डॉलर के विज़न को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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