- बेटे बेटियों की हर संभव पूरी करते है हर इच्छा, मातापिता के मान सम्मान का ध्यान रखे हर बच्चा : पं राजेश शर्मा
उन्होने कहा कि माता रूकमणी के भाई किसी अयोग्य युवराज से रूकमणी का विवाह कराने चाहते थे किंतू रूकमणी ने आत्म से भगवान श्रीकृष्ण को पति मान लिया था माता रूकमणी और परिजनों की सहमति से रूकमणी हरण की लीला भगवान के द्वारा की गई। विवाह प्रसंग के द्वारा माता रूकमणी की श्रद्धालु महिलाओं के द्वारा पेर पूजन और कन्यादान भजन कीर्तन के साथ सम्पन्न कराया गया। पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण जब भक्त को देते है तो छप्पड़ फाड़ कर देते है दरिद्र सुदामा को भगवान ने दोनों लोक दे दिए थे हमें भगवान की भक्ति विश्वास श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। कथा के मुख्य यजमान अनिल सक्सेना ने परिजनों के साथ गीताजी की विधिवत पूजा अर्चना की और यज्ञ में कथा पूर्णाहुति के लिए आहुतियां दी। समापन अवसर पर भव्य शौभायात्रा निकाली गई। प्रसादी के साथ श्रीमद भागवत कथा का विश्राम किया गया।

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