दिल्ली : ‘विकसित भारत एवं मिशन 2047’ पर मुस्लिम महिला बौद्धिक सम्मेलन आईआईसी संपन्न - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

दिल्ली : ‘विकसित भारत एवं मिशन 2047’ पर मुस्लिम महिला बौद्धिक सम्मेलन आईआईसी संपन्न

  • महिला नेतृत्व, शिक्षाविदों और मीडिया प्रतिनिधियों ने राष्ट्र निर्माण में मुस्लिम महिलाओं की निर्णायक भूमिका पर दिया बल

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नई दिल्ली, 4 फरवरी (रजनीश के झा)। “विकसित भारत एवं मिशन 2047” विषय पर आयोजित मुस्लिम महिला बौद्धिक सम्मेलन आज भारत अंतरराष्ट्रीय केंद्र (आईआईसी), नई दिल्ली के कॉन्फ्रेंस हॉल–1 में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में महिला शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, मीडिया पेशेवरों एवं सामाजिक नेताओं ने भाग लिया और वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मुस्लिम महिलाओं की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया। सम्मेलन की अध्यक्षता माननीय डॉ. इंद्रेश कुमार, मार्गदर्शक, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि विकसित भारत की नींव केवल भौतिक अवसंरचना पर नहीं, बल्कि शिक्षित, चरित्रवान और नैतिक नागरिकों पर टिकी होती है।


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उन्होंने कहा, “विकसित भारत केवल इमारतों से नहीं बनता, बल्कि ऐसे नागरिकों से बनता है जिनमें चरित्र, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व हो। शिक्षा का उद्देश्य प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि नफरत को। चरित्र ही विकसित भारत की असली नींव है।”सम्मेलन में “एक क़ौम, एक वतन – हिंदुस्तान” की भावना को केंद्र में रखते हुए विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी समुदायों की सामूहिक भागीदारी पर बल दिया गया। डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक सौहार्द और सतत बौद्धिक संवाद मिशन 2047 के प्रमुख स्तंभ हैं। इस अवसर पर सुश्री शालिनी अली, राष्ट्रीय संयोजक, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, ने मुस्लिम महिलाओं की बढ़ती आकांक्षाओं, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से मुस्लिम महिलाएं राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं। इन्हीं विचारों को आगे बढ़ाते हुए डॉ. शाहिद अख्तर, राष्ट्रीय संयोजक, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, ने कहा कि मिशन 2047 की सफलता समाज के हर वर्ग की रचनात्मक भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाएं बौद्धिक सहभागिता, सामाजिक नेतृत्व और आत्मनिर्भरता के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।


सभा को संबोधित करते हुए सुश्री सबीहा अहमद, सदस्य, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, ने सम्मेलन को ऐतिहासिक और मिशन-केंद्रित बताते हुए उद्देश्य की स्पष्टता, समर्पण और “राइजिंग बियॉन्ड द वेल” जैसे महिला-केंद्रित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, जो मुस्लिम महिलाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान के लिए सशक्त बनाते हैं। मीडिया और सामाजिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए सुश्री नगमा सहर, एंकर, एनडीटीवी, ने कहा कि आत्मविश्वास, मीडिया में उचित प्रतिनिधित्व और मुख्यधारा में सहभागिता महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने जोर दिया कि मुस्लिम महिलाओं को संकीर्ण पहचान में सीमित न करके समान नागरिक और राष्ट्र निर्माता के रूप में देखा जाना चाहिए। सम्मेलन के दौरान शिक्षा, आर्थिक सहभागिता, महिला नेतृत्व, मीडिया प्रतिनिधित्व और सामाजिक सौहार्द जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मुस्लिम महिलाएं विकास की केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि भारत की समावेशी विकास यात्रा की सक्रिय सहभागी और वाहक हैं। सम्मेलन का समापन वर्ष 2047 तक एक विकसित, समावेशी और एकजुट भारत के साझा राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु बौद्धिक मंचों को सशक्त करने, महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करने और सामूहिक प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।

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