- धार्मिक आस्था, प्रशासनिक दृष्टि और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय से काशी विश्वनाथ धाम के सर्वांगीण विकास का खाका तय
परंपरा और प्रबंधन का संतुलन: अर्चकों की सेवा शर्तों पर विचार
बैठक में मंदिर में कार्यरत अर्चकों की सेवा शर्तों को सुव्यवस्थित करने के लिए न्यास परिषद और अर्चकों के बीच अनुबंध प्रस्ताव पर चर्चा कर उसे स्वीकृति प्रदान की गई। यह निर्णय मंदिर की धार्मिक परंपराओं को संरक्षित रखते हुए प्रशासनिक स्पष्टता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर परिसर स्थित अन्नपूर्णा मंदिर के सौंदर्यीकरण को भी स्वीकृति दी गई, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर आध्यात्मिक अनुभव मिल सके।
गौसेवा और धर्मपरंपरा का समन्वय
सारनाथ के बेनीपुर स्थित संकट हरण हनुमान मंदिर की गौशाला के समस्त व्यय का भार मंदिर न्यास द्वारा वहन करने का निर्णय लिया गया। साथ ही प्रत्येक प्रदोष तिथि पर गौवंश के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रस्ताव पारित हुआ। इसे सनातन परंपरा में गौसंरक्षण की भावना को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
संस्कृत शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहन
काशी की पहचान केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि विद्या और शास्त्र परंपरा से भी जुड़ी रही है। इसी क्रम में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए उपवेशन (बैठने) की व्यवस्था हेतु धनराशि स्वीकृत की गई। इसके अतिरिक्त प्रयागराज जनपद के उस्तापुर महमूदाबाद स्थित प्राचीन संस्कृत पाठशाला के भूखंड पर बाउंड्रीवाल निर्माण का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया, जिससे परंपरागत गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था को संरक्षण मिल सके।
मंदिरों के संरचनात्मक विकास को मिली गति
बैठक में चंदौली जनपद के सकलडीहा स्थित कालेश्वरनाथ मंदिर परिसर में कक्ष, रसोईघर और स्नानागार निर्माण तथा जर्जर भवन की मरम्मत को स्वीकृति दी गई। साथ ही विद्युत व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत के लिए एजेंसी चयन का प्रस्ताव भी पारित हुआ। यह निर्णय क्षेत्रीय मंदिरों को काशी विश्वनाथ न्यास की संरक्षण परंपरा से जोड़ने का संकेत देता है।
धाम परिसर में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार
विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद की बैठक में धाम परिसर को अधिक सुव्यवस्थित और श्रद्धालु अनुकूल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। धाम के 50 प्रतिशत शौचालयों को भारतीय शैली में परिवर्तित करने का निर्णय. धाम परिसर की दुकानों की विद्युत दरों को नियत (फिक्स) करने का प्रस्ताव. मल्टीपरपज हॉल के लाभ-साझाकरण मॉडल पर विचार. टेंसाइल शेडिंग कार्य को स्वीकृति. इन निर्णयों का उद्देश्य बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
काशी की आध्यात्मिक विरासत को डिजिटल स्वरूप
धाम परिसर स्थित सिटी म्यूजियम और वाराणसी गैलरी में 3डी इमर्सिव संग्रहालय संचालन हेतु कंसल्टेंट चयन का प्रस्ताव भी बैठक में पारित किया गया। इससे काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। यह पहल काशी के आध्यात्मिक इतिहास को वैश्विक स्तर पर डिजिटल पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शंकर परंपरा का प्रतिनिधित्व
बैठक में शारदापीठम् श्रृंगेरी के जगद्गुरु शंकराचार्य परंपरा का प्रतिनिधित्व भी उपस्थित रहा। पूज्य भारतीतीर्थ महास्वामी के प्रतिनिधि की सहभागिता ने निर्णयों को धार्मिक मान्यता और परंपरागत संतुलन प्रदान किया।
काशी विश्वनाथ धाम: आस्था से प्रशासन तक एक मॉडल
बैठक में पारित निर्णयों से स्पष्ट है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि “आस्था-आधारित व्यवस्थागत मॉडल” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक प्रबंधन, डिजिटल प्रस्तुति, सांस्कृतिक संरक्षण और धर्मपरंपरा—इन चारों स्तंभों पर धाम के विकास का ढांचा तैयार किया जा रहा है। काशी की परंपरा सदियों से आध्यात्मिकता और ज्ञान का संगम रही है। वर्तमान प्रशासनिक पहलें इस विरासत को संरक्षित करते हुए उसे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने का प्रयास हैं.
मंडलायुक्त एस राजलिंगम (अध्यक्ष), जिलाधिकारी, सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, उपाध्यक्ष, वाराणसी विकास प्राधिकरण. पदेन सदस्य सचिव/मुख्य कार्यपालक अधिकारी, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विश्व भूषण मिश्र, कुलपति, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय प्रो. बिहारी लाल शर्मा, प्रमुख सचिव (न्याय) एवं विधि परामर्शी मुख्य कोषाधिकारी, अपर पुलिस उपायुक्त (सुरक्षा), कमिश्नरेट, प्रतिनिधि, शारदापीठम् श्रृंगेरी – पूज्य भारतीतीर्थ महास्वामी के प्रतिनिधि, मंदिर न्यास परिषद एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के अन्य नामित सदस्य मौजूद रहे.

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