दो दिन की छुट्टी में मिली सलाह,
ऐसी सलाह जो दो दिलों को मिला देती है।
वही सलाह मैं फिर से पाना चाहती हूँ,
एक नई उम्मीद फिर जगाना चाहती हूँ।
ऐसे हैं ये पल जो बिछड़ गए हैं मुझसे,
चले गए वो दिन जिनसे उम्मीद मिलती थी।
फिर एक दिन चरखा आई,
दिया जिसने मुझे सहारा,
टूटी उम्मीदों के बीच,
एक नई राह दिखाया।
अब अपने कदम बढ़ाने हैं,
अब अपनी मंज़िल पानी है,
बिछड़े पलों को याद कर
टूटी उम्मीद को फिर जगानी है।
दीपा
कक्षा – 11वीं
गाँव – सुराग
टीम गांव की आवाज

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