- लाखों की संख्या में आए श्रद्धालुओं को आधुनिक भोजनशाला से निशुल्क भोजन प्रसादी का वितरण
- श्रद्धालुओं के लिए करीब 10 एकड़ में लगाई भोजनशाला, निरंतर भोजन प्रसादी का सेवादार कर रहे भोजन वितरण
प्रमुख अतिथि और स्वागत समारोह
कथा के तीसरे दिन राजनीति और धर्म क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सीहोर जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर का स्वागत किया गया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पंडित श्री मिश्रा द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों (अस्पताल, भोजनालय) की सराहना करते हुए कहा कि पहले सीहोर अपनी कचौरी के लिए प्रसिद्ध था लेकिन आज पंडित प्रदीप मिश्रा की भक्ति के कारण वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा है। इसके साथ ही खाटूश्याम जी के प्रतिनिधि, सनातन धर्म का प्रचार करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अखंड हिंद फौज का भी शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया।
कथा के मुख्य अंश और आध्यात्मिक उपदेश
पंडित प्रदीप मिश्रा ने नम: शिवाय के जाप के साथ शिव महिमा का वर्णन किया। उन्होंने प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला: शिवोहम का दर्शन: पंडित जी ने कहा कि शिव कहीं बाहर नहीं, बल्कि हर कंकड़ और मनुष्य की हर रोमावली में निवास करते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि दूसरे बाबाओं के पैर छूने से पहले एक बार स्वयं के पैर छुओ, क्योंकि तुम्हारे भीतर भी शिव का अंश है। भाग्य और महादेव: पंडित जी ने स्पष्ट किया कि भाग्य लिखना विधाता का काम है, लेकिन उस भाग्य को बदलने की शक्ति केवल महाकाल बाबा में है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से नाता मन का होना चाहिए, दिखावे का नहीं। विश्वास की पराकाष्ठा (असंभव को संभव): कथा के दौरान एक मर्मस्पर्शी पत्र पढ़ा गया, जिसमें एक महिला ने बताया कि डॉक्टरों द्वारा मना करने के बाद भी कुबेरेश्वर धाम की मिट्टी और एक लोटा जल के विश्वास से उन्हें 20 साल बाद संतान सुख प्राप्त हुआ। पंडित जी ने इसे 'आस्था का चमत्कारÓ बताया। शरण और चरण का अंतर: पंडित श्री मिश्रा ने समझाया कि माता-पिता और गुरु के चरणों में हमेशा बैठना कठिन है, लेकिन उनके बताए मार्ग और शरण में रहना सरल है। जो शिव की शरण में है, उसकी चिंता स्वयं महादेव करते हैं।
सती चरित्र और शिव-पार्वती विवाह
कथा के प्रसंग में माता सती के बाल्यकाल और उनके दृढ़ निश्चय का वर्णन किया गया। पंडित श्री मिश्रा ने बताया कि कैसे अपमानित होने के बाद भी सती जी ने पत्थर की मूर्ति में परमात्मा को प्रकट कर लिया और शिव को वर के रूप में चुना। उन्होंने कहा कि 'हमारा सनातन धर्म पत्थर में भी परमात्मा प्रकट करने की सामर्थ्य रखता है।Ó कथा का समापन सती माता के त्याग और पुन: पार्वती रूप में जन्म लेकर शिव से मिलन की दिव्य झांकी और आरती के साथ हुआ।
सामाजिक सरोकार और आगामी जानकारी
पंडित जी ने प्रकृति संरक्षण के लिए पौधारोपण करने वालों को धन्यवाद दिया और गौ-सेवा व 351 कमरों की निर्माणाधीन धर्मशाला में सहयोग की अपील की। उन्होंने भक्तों से भीषण गर्मी को देखते हुए बार-बार पानी पीते रहने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने का विशेष आग्रह किया।
आज बागेश्वरधाम के कथा वाचक धीरेन्द्र शास्त्री पहुंचेंगे कुबेरेश्वरधाम
समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सनातन धर्म को जन-जन तक पहुचाने का संकल्प लेकर निरंतर आगे बढ़ने वाले इस कलियुग में शिव युग लाने वाले अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा आयोजित भव्य रुद्राक्ष महोत्सव में मंगलवार को बागेश्वरधाम के कथा वाचक धीरेन्द्र शास्त्री पहुंचेंगे। इसके अलावा 19 फरवरी को कथा वाचक देवकीनंद ठाकुर और 20 फरवरी को 18 पुराणों से धर्म को जागरूक करने वाले कौशिक महाराज शामिल रहेंगे। इसके अलावा अन्य संतों और जनप्रतिनिधियों के आगमन को लेकर तैयारियां पूर्ण की गई है।
.jpeg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें