- महाशिवरात्रि पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में रात-दिन चलता रहा दर्शन , हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा काशी
रात से शाम तक भक्ति की अखंड धारा
निरंतर दर्शन व्यवस्था के अंतर्गत 16 फरवरी की रात्रि 12ः00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक कुल 2 लाख 74 हजार 865 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। वहीं रात्रि 08:00 बजे तक यह संख्या 2 लाख 65 हजार 38 थी। इससे स्पष्ट है कि देर शाम तक श्रद्धालुओं का प्रवाह लगातार बना रहा और दर्शन की गति कम नहीं हुई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शिवरात्रि के चरम समय में श्रद्धालुओं का प्रवाह कितनी तीव्र गति से बढ़ा। रातभर श्रद्धालु कतारों में खड़े रहे और सुबह होते-होते धाम परिसर भक्तों से पूरी तरह भर गया। धाम परिसर में श्रद्धालुओं की कतारें कई किलोमीटर तक फैली रहीं, लेकिन व्यवस्था इतनी सुव्यवस्थित रही कि भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। शिवभक्तों के चेहरों पर बाबा के दर्शन की प्रतीक्षा का उल्लास और दर्शन के बाद संतोष की दिव्य चमक साफ दिखाई दी।सुरक्षा, सेवा और व्यवस्था का उत्कृष्ट समन्वय
अत्यधिक भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बहुस्तरीय प्रबंधन लागू किया। दर्शन पंक्तियों को व्यवस्थित रखने, चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा श्रद्धालुओं को सुगम मार्गदर्शन देने के लिए स्वयंसेवकों की विशेष तैनाती की गई। प्रशासन की सतर्कता और सेवाभाव के कारण लाखों श्रद्धालु निर्बाध रूप से दर्शन कर सके।भक्ति, संस्कृति और काशी की आध्यात्मिक विरासत का उत्सव
शिवरात्रि पर बाबा दरबार केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, लोक आस्था और सनातन परंपरा के विराट उत्सव का सजीव प्रतीक बन गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं के साथ विदेशी भक्तों की उपस्थिति ने भी इस आध्यात्मिक आयोजन को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव करते नजर आए। धाम के आसपास के घाट, गलियां और बाजार भी श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहे। अनेक श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन-अर्चन में शामिल हुए।
काशी ने फिर दिया आस्था का संदेश
महाशिवरात्रि पर उमड़ी श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत आत्मा है। इस बार महाशिवरात्रि पर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं के साथ विदेशी भक्तों की उपस्थिति ने भी आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। यहां पहुंचने वाला हर श्रद्धालु आध्यात्मिक अनुभूति लेकर लौटता है और यही अनुभूति काशी को विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर अद्वितीय बनाती है। श्रद्धालुओं का मानना रहा कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि हर वर्ष महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ धाम श्रद्धा का वैश्विक केंद्र बन जाता है।



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