- श्री कृष्ण जन्मस्थली मथुरा से आए पावन उपहारों ने काशी विश्वनाथ धाम में रचा आध्यात्मिक संगम, महाशिवरात्रि पर दिखी सनातन संस्कृति की अखंड एकात्म चेतना
सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में उस क्षण भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण निर्मित हुआ, जब डमरू की गूंज, शंखनाद की मंगलध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के पवित्र स्वर पूरे परिसर में प्रतिध्वनित होने लगे। इस दिव्य वातावरण में मथुरा से लाए गए उपहारों को विधि-विधान और पूर्ण श्रद्धा के साथ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा स्वीकार किया गया। यह क्षण केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत का पुनर्स्मरण था। कार्यक्रम के अगले चरण में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से भी मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थली के लिए विशेष पूजन सामग्री और उपहार भगवान श्री विश्वेश्वर को अर्पित कर उनके अवलोकन के पश्चात समारोहपूर्वक मथुरा से आए प्रतिनिधियों को प्रदान किए गए। लड्डू गोपाल के प्रतिनिधि जनों को भगवान विश्वेश्वर की ओर से विधिपूर्वक दक्षिणा एवं सम्मान अर्पित करते हुए मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा द्वारा सादर प्रणाम कर विदाई दी गई। इस परंपरा ने यह स्पष्ट किया कि सनातन संस्कृति में देवों की आराधना केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि भावनाओं और संबंधों की आध्यात्मिक अभिव्यक्ति भी है।
दरअसल, सनातन धर्म की विराटता उसकी विविधता में ही निहित है। काशी में शिव का तांडव और ब्रज में श्रीकृष्ण की रास—दोनों ही एक ही आध्यात्मिक चेतना के भिन्न आयाम हैं। हरि और हर का यह अद्भुत संबंध शास्त्रों में भी वर्णित है, जहां शिव श्रीकृष्ण के परम भक्त माने जाते हैं और श्रीकृष्ण स्वयं शिवत्व की महिमा का गुणगान करते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से यह शाश्वत संबंध केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के मध्य जीवंत अनुभव के रूप में स्थापित होता है। आज के दौर में जब सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के संरक्षण की चुनौती सामने है, तब इस प्रकार के नवाचार सनातन संस्कृति की जीवटता और व्यापकता का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि सनातन परंपरा किसी सीमित क्षेत्र या संप्रदाय की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता को जोड़ने वाली आध्यात्मिक धारा है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस पावन अवसर पर श्री कृष्ण जन्मस्थली मंदिर न्यास के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए समस्त शिवभक्तों एवं कृष्णभक्त सनातन बंधुओं को शुभकामनाएं प्रेषित कीं। यह आयोजन आने वाले समय में काशी और ब्रज के मध्य धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगा।

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