समस्तीपुर : 5–6 रुपये किलो बिक रहा आलू, किसान बेहाल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

समस्तीपुर : 5–6 रुपये किलो बिक रहा आलू, किसान बेहाल

  • लागत नहीं निकलने से किसानों की बढ़ी चिंता, सरकारी हस्तक्षेप की मांग तेज
  • किसान महासभा एवं माले टीम ने पीड़ित किसानों से मिल जाना खेती-किसानी का हालचाल

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ताजपुर/समस्तीपुर (रजनीश के झा), 28 फरवरी। आलू उत्पादन का हब माने जाने वाले ताजपुर एवं आसपास के पूसा, मोरबा, सरायरंजन आदि प्रखंडों में इन दिनों आलू किसानों की हालत दयनीय बनी हुई है। मंडियों में आलू की कीमत महज 5 से 6 रुपये प्रति किलो तक सिमट गई है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि इतनी कम कीमत पर बिक्री करने से खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है। जबकी ताजपुर समेत समस्तीपुर जिले के विभिन्न प्रखंडों में इस बार आलू की पैदावार भी अच्छी नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में कीमत कम रहना किसान, व्यापारी समेत कृषि विशेषज्ञों के भी समझ से पड़े है। बतौर गद्दीदार मंजीत कुमार सिंह, श्यामबाबू सिंह एक तो बाजार में मांग कमजोर रहने और बाहरी राज्यों से आवक बढ़ने के कारण कीमतों में भारी गिरावट आ गई है। अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता सह आलू उत्पादक किसान ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह किसान बीज, खाद,जूताई, सिंचाई, दवाई, मजदूरी और परिवहन मिलाकर प्रति किलो लागत करीब 15 रूपये तक आती है, जबकि उन्हें 5–6 रुपये में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।


आलू उत्पादक किसान दिनेश प्रसाद सिंह ने कहा है कि वे 25 वर्षों से आलू की खेती कर रहे हैं, आज तक इतनी कम कीमत कभी नहीं रही है।मोतीपुर के आलू उत्पादक किसान राजदेव प्रसाद सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, मोती लाल सिंह, फतेहपुर के मनोज कुमार सिंह, रतन सिंह, रहीमाबाद के मुंशीलाल राय, कस्बे आहर के संजीव राय, रामापुर महेशपुर के शिव कुमार सिंह आदि ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की भी सीमित क्षमता है और भंडारण शुल्क अलग से देना पड़ता है। ऐसे में छोटे और सीमांत किसान तत्काल नकदी की जरूरत के कारण कम दाम पर ही फसल बेच रहे हैं। किसानों ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने और कोल्ड स्टोरेज शुल्क में राहत देने की मांग की है। भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह का मानना है कि यदि समय रहते सरकारी खरीद या बाजार स्थिरीकरण के उपाय नहीं किए गए, तो किसानों का रुझान अगली फसल में आलू उत्पादन से कम हो सकता है, जिसका असर आने वाले समय में बाजार पर भी पड़ेगा। अखिल भारतीय किसान महासभा एवं भाकपा माले ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। फिलहाल जिले के आलू उत्पादक किसान नुकसान और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। आलू उत्पादक किसान राजदेव प्रसाद सिंह ने बंगाल के तर्ज़ पर बिहार में भी आलू की सरकारी दर तय कर खरीद करने को लेकर आर्डिनेंस जारी करने की सरकार से मांग की।

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