- श्रीमद् भागवत कथा में शिव विवाह का प्रसंग हुआ
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सीहोर। मुक्ति पाने के लिए भगवान का सुमिरन करना जरूरी है। बिना भजन के कलयुग में मुक्ति मिलना मुश्किल है। मनुष्य जीवन ठाकुर जी को पाना के लिए हुआ है। कलयुग में प्रभू का भजन कीर्तन सत्संग ही परम धर्म है। रविवार को मोर गार्डन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में शिव विवाह का प्रसंग प्रस्तुत करते हुए पंडित राजेश शर्मा उक्त बात कहीं। उन्होने कहा कि व्यक्ति को समय निकालकर राम नाम का सुमिरण करना चाहिए मनुष्य को अंत समय में राम का नाम ही काम आएगा क्योंकी भगवान शिव के आराध्य भगवान श्रीराम ही थे। राम का नाम और कथा का रसपान मनुष्य तर जाता है। कथा वाचक पं.राजेश शर्मा ने कहा कि कथाऐ अनेक दिन होगी हर दिन की कथा का अलग महत्व होता है। इस कलयुग में अनेक प्रकार के कष्ट भोगने वाले सभी मनुष्य सिर्फ भगवान नाम का सुमिरण करने के लिए ही संसार में आए है। हमको 84 लाख योनियों को भोगने के वाद मनुष्य तन मिलता है इस लिए जीवन में हमें भगवान को सुमिरण करके अपने जीवन को धन्य करना चाहिए। एक होता है धर्म और एक होता है परमधर्म केवल परम धर्म शरीर और परिवार धर्मो का निर्वाहन करता है। इस जीवन में हमने माता पिता गुरू सेवा करली तो फिर कही भटकने की जरूरत नहीं है। श्रवण कुमार की कथा सबने सुनी होगी कुछ समय निकालकर राम नाम का सुमिरन करना चाहिए। राम नाम जिन्दगी में एक बार भी ले लिया तो मनुष्य को अंत समय में राम का नाम काम आएगा। राम से बडा़ राम का नाम होता है। आत्मा का भोजन भजन है इस लिए मनुष्य जब थोड़ा भजन करता है तो आत्म प्रसन्न हो जाती है।
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