- जिला विकास मंच के सदस्यों ने किया चीनी मिल परिसर का मुआयना, बताया सर्वसुविधा संपन्न परिसर
1. भूमि : चीनी मिल के लिए कम से कम 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है जबकी बंद मिल के पास 22 एकड़ से भी अधिक जमीन है।
2. विधुत : चीनी मिल के मशीनों एवं उपकरणों को चलाने के लिए विधुत आवश्यक है और चीनी मिल चौक पर ही विधुत ग्रीड है।
3. रेल परिवहन : गन्ने को मिल तक पहुंचाने एवं तैयार चीनी को बाजार तक पहुंचाने को इस मिल के पास रेल परिवहन सुविधा मौजूद है।
4. सड़क : किसान के खेत से गन्ने को मिल तक पहुंचाने एवं चीनी को बाजार तक पहुंचाने के लिए मिल के चारों ओर सड़क सुविधा मौजूद है।
5. पानी : मिल में पानी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए मिल से सटे बूढ़ी गंडक नदी समेत अन्य जलस्रोत है।
6. गाद निकासी : चीनी मिल के बगल में गाद की सफाई के बाद निकासी हेतु बूढ़ी गंडक नदी है।
7. कच्चा माल : मिल के लिए गन्ने की उपलब्धता जरूरी है। मिल के आसपास के वारिसनगर, कल्याणपुर, पूसा, ताजपुर, मोरबा- सरायरंजन, उजियारपुर आदि प्रखंड गन्ना उत्पादक केंद्र रहा है।
8. श्रमिक : मिल के आसपास के क्षेत्रों में सस्ते श्रमिक की बहुलता है।
विदित हो कि 22 एकड़ से अधिक भूमि क्षेत्र में फैला समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना 1917 में अंग्रेज सरकार द्वारा किया गया था। यह मिल बिहार के तत्कालीन सभी मिलों में सुमार थी। उच्च कोटी का चीनी का उत्पादन होता था। सरकार की अनदेखी के कारण 1997 में मिल बंद हो गई। मिल को चालू करने का कई बार प्रयास हुआ लेकिन असफल रहा। जिला विकास मंच एवं भाकपा माले बंद चीनी मिल को चालू करने की मांग को लेकर लगातार संघर्षरत हैं। संगठनद्वय हरेक मंच-मौके पर मिल को चालू करने की मांग उठाती रही है।

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