समस्तीपुर : भूमि, पानी, सड़क, विधुत, रेल सुविधा से संपन्न बंद पड़ा चीनी मिल चालू हो : सुरेंद्र - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

समस्तीपुर : भूमि, पानी, सड़क, विधुत, रेल सुविधा से संपन्न बंद पड़ा चीनी मिल चालू हो : सुरेंद्र

  • जिला विकास मंच के सदस्यों ने किया चीनी मिल परिसर का मुआयना, बताया सर्वसुविधा संपन्न परिसर

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समस्तीपुर (रजनीश के झा), 24 फरवरी। समस्तीपुर जिला विकास मंच द्वारा समस्तीपुर का बंद चीनी मिल चालू करने को लेकर जारी धारावाहिक संघर्ष के दरम्यान जिलाधिकारी द्वारा बंद चीनी मिल को चालू करने की दिशा में कारवाई करते हुए "तीन अधिकारियों की टीम गठित कर रिपोर्ट मांगने" के कदम को चीनी मिल चालू होने की दिशा में स्वागत योग्य कदम बताया है। जिलाधिकारी द्वारा 23 फरवरी को टीम गठन के बाद मंगलवार को जिला विकास मंच एवं भाकपा माले की संयुक्त टीम सुरेंद्र प्रसाद सिंह, दीनबंधु प्रसाद, रामबली सिंह आदि के नेतृत्व में बंद पड़ा चीनी मिल परिसर का दौरा कर परिसर का मुआयना किया। मौके पर मंच के सदस्य सह भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने मिल संचालन के लिए आधारभूत आवश्यकता की जानकारी देते हुए कहा कि

1. भूमि : चीनी मिल के लिए कम से कम 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है जबकी बंद मिल के पास 22 एकड़ से भी अधिक जमीन है।

2. विधुत : चीनी मिल के मशीनों एवं उपकरणों को चलाने के लिए विधुत आवश्यक है और चीनी मिल चौक पर ही विधुत ग्रीड है।

3. रेल परिवहन : गन्ने को मिल तक पहुंचाने एवं तैयार चीनी को बाजार तक पहुंचाने को इस मिल के पास रेल परिवहन सुविधा मौजूद है।

4. सड़क : किसान के खेत से गन्ने को मिल तक पहुंचाने एवं चीनी को बाजार तक पहुंचाने के लिए मिल के चारों ओर सड़क सुविधा मौजूद है।

5. पानी : मिल में पानी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए मिल से सटे बूढ़ी गंडक नदी समेत अन्य जलस्रोत है।

6. गाद निकासी : चीनी मिल के बगल में गाद की सफाई के बाद निकासी हेतु बूढ़ी गंडक नदी है।

7. कच्चा माल : मिल के लिए गन्ने की उपलब्धता जरूरी है। मिल के आसपास के वारिसनगर, कल्याणपुर, पूसा, ताजपुर, मोरबा- सरायरंजन, उजियारपुर आदि प्रखंड गन्ना उत्पादक केंद्र रहा है।

8. श्रमिक : मिल के आसपास के क्षेत्रों में सस्ते श्रमिक की बहुलता है।


विदित हो कि 22 एकड़ से अधिक भूमि क्षेत्र में फैला समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना 1917 में अंग्रेज सरकार द्वारा किया गया था। यह मिल बिहार के तत्कालीन सभी मिलों में सुमार थी। उच्च कोटी का चीनी का उत्पादन होता था। सरकार की अनदेखी के कारण 1997 में मिल बंद हो गई। मिल को चालू करने का कई बार प्रयास हुआ लेकिन असफल रहा। जिला विकास मंच एवं भाकपा माले बंद चीनी मिल को चालू करने की मांग को लेकर लगातार संघर्षरत हैं। संगठनद्वय हरेक मंच-मौके पर मिल को चालू करने की मांग उठाती रही है।

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