कथा के अंतिम दिन पंडित संजय गोस्वामी ने राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म, कपिल संवाद का प्रसंग सुनाया। शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार परीक्षित महाराज वनों में काफी दूर चले गए। उनको प्यास लगी, पास में समीक ऋषि के आश्रम में पहुंचे और बोले ऋषिवर मुझे पानी पिला दो मुझे प्यास लगी है, लेकिन समीक ऋषि समाधि में थे, इसलिए पानी नहीं पिला सके। परीक्षित ने सोचा कि इसने मेरा अपमान किया है मुझे भी इसका अपमान करना चाहिए। उसने पास में से एक मरा हुआ सर्प उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी। ऋषि के पुत्र ने नदी का जल हाथ में लेकर शाप दे डाला जिसने मेरे पिता का अपमान किया है आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प पक्षी आएगा और उसे जलाकर भस्म कर देगा। समीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित है और यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है। देवयोग वश परीक्षित ने आज वही मुकुट पहन रखा था। समीक ऋषि ने यह सूचना जाकर परीक्षित महाराज को दी कि आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प पक्षी तुम्हें जलाकर नष्ट कर देगा। कथा के अंतिम दिन पंडित श्री गोस्वामी ने भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा चरित्र के बारे में विस्तार से बताया कि दोस्ती सेठ और गरीब किसी भी वर्ग की हो सकती है। इसमें कोई भी बड़ा और छोटा नहीं होता है।
सीहोर। ग्राम लसूडिया खास में जारी सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का समापन के अवसर पर भव्य रूप से भोजन प्रसादी का वितरण किया गया। दशनामी गोस्वामी परिवार और समस्त ग्रामवासी लसूडियाखास के संयोजक पंडित ओम गिरी महाराज आदि शामिल थे। सात दिवसीय कथा के दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। इस संबंध में मोहन गोस्वामी ने बताया कि यहां पर भगवान शिव का मंदिर का निर्माण किया गया है। कथा के अंतिम दिवस भगवान श्री कृष्ण और भक्त सुदामा की मित्रता का भावपूर्ण विस्तार से वर्णन किया गया।
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