- स्मार्ट मीटर पर संग्राम | रियायती बिजली पर वार | निजीकरण की आहट से बिजली कर्मियों का पलटवार
- 26 को निर्णायक बैठक, आंदोलन तेज होने के संकेत
प्रदेशभर में प्रदर्शन, जिला मुख्यालयों पर सौंपे गए ज्ञापन
संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बिजली कर्मियों ने एकजुट होकर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया और अधिकारियों को ज्ञापन देकर विरोध दर्ज कराया। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों की सेवा शर्तों से छेड़छाड़ औद्योगिक अशांति को जन्म दे सकती है।
25 जनवरी 2000 का समझौता बना आंदोलन का आधार
संघर्ष समिति ने कहा कि 25 जनवरी 2000 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्त के साथ हुए लिखित समझौते में बिजली कर्मियों को रियायती बिजली सुविधा जारी रखने का स्पष्ट प्रावधान किया गया था। इसी आधार पर बनी ट्रांसफर स्कीम-2000 में भी कर्मचारियों की सुविधाओं को संरक्षित रखा गया। संघर्ष समिति के अनुसार पावर सेक्टर रिफॉर्म एक्ट और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 133(2) में भी कर्मचारियों की सेवा शर्तों को कमतर न करने का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान कार्रवाई इन नियमों के विपरीत बताई जा रही है।
निजीकरण की तैयारी का आरोप, फ्रेंचाइजी मॉडल पर सवाल
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि लखनऊ में वर्टिकल व्यवस्था लागू कर विद्युत ढांचे को फ्रेंचाइजी मॉडल की ओर धकेला जा रहा है। कर्मचारियों के आवासों पर स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई को उसी रणनीति का हिस्सा बताया गया।
26 फरवरी को निर्णायक बैठक, आंदोलन तेज होने के संकेत
संघर्ष समिति की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक 26 फरवरी को लखनऊ में प्रस्तावित है, जिसमें रियायती बिजली समाप्त करने के प्रयास, निजीकरण विरोधी आंदोलन और कर्मचारियों के उत्पीड़न के मुद्दों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में ई. मायाशंकर तिवारी, राजेंद्र सिंह, राजेश सिंह, मनोज जैसवाल, मनोज सोनकर, कृष्णमोहन सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

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