- 80 क्विंटल फलहारी खिचड़ी और 50 क्विंटल से अधिक छाछ का श्रद्धालुओं को किया वितरण
- ग्रीन शिवरात्रि का यह विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा
भक्ति, राष्ट्रवाद और पर्यावरण संरक्षण के त्रिवेणी संगम का साक्षी
समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि विठ्ठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा एवं रुद्राक्ष महोत्सव के दूसरे दिन कुबेरेश्वर धाम भक्ति, राष्ट्रवाद और पर्यावरण संरक्षण के त्रिवेणी संगम का साक्षी बना। पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज के आह्वान पर आज देश-दुनिया में करोड़ों अनुयायियों ने 'ग्रीन शिवरात्रिÓ मनाई। कथा के प्रारंभ में महाराज श्री ने ज्योतिर्लिंग वाटिका में 13 पौधों का रोपण कर प्रकृति सेवा का संदेश दिया।कथा के दूसरे दिन मंच पर देश की कई प्रतिष्ठित विभूतियाँ उपस्थित रहीं।
पद्मश्री डॉ. उमाशंकर पाण्डेय (जल संरक्षण विशेषज्ञ): उन्होंने महाराज के सामाजिक और पर्यावरणीय योगदान की तुलना राष्ट्र-ऋषि नानाजी देशमुख से की। डॉ. पाण्डेय ने सरकार से पुरजोर मांग करते हुए कहा, 'पंडित प्रदीप मिश्रा जिस निस्वार्थ भाव से जल और प्रकृति संरक्षण के लिए करोड़ों लोगों को जागरूक कर रहे हैं, इसके लिए उन्हें 'पद्म पुरस्कारÓ से सम्मानित किया जाना चाहिए। 'ग्रीन शिवरात्रिÓ का यह विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा। ' गोपाल आर्या राष्ट्रीय संयोजक, पर्यावरण गतिविधि उन्होंने मार्मिक कहानियों के माध्यम से भक्तों को समझाया कि प्रकृति की रक्षा ही धर्म की वास्तविक रक्षा है। उन्होंने महाराज के सामाजिक समर्पण की सराहना करते हुए इसे 'नव-जागरणÓ की संज्ञा दी। डॉ. यशदेव शास्त्री महामंत्री, पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास: उन्होंने पतंजलि परिवार की ओर से महाराज श्री का अभिनंदन किया और बताया कि कैसे पूज्य गुरुदेव की लोकप्रियता आज स्वदेशी और योग के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित हो रही है।
कथा के मुख्य आध्यात्मिक बिंदु: शिव तो श्वासों में हैं
पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने 'शिव महापुराणÓ के रहस्यों को खोलते हुए कहा कि भगवान शिव को ढूंढने के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है।
1. आत्मलिंग का बोध: महाराज श्री ने कहा, आत्मा को ही लिंग कहते हैं, जिसे हमारे यहां आत्मलिंग कहा गया है। महादेव हमारी श्वासों के रूप में हमारे भीतर ही विराजमान हैं।
2. सहनशीलता ही असली वैभव: उन्होंने शिव चरित्र की व्याख्या करते हुए बताया कि महादेव अपने भक्त को धन-दौलत देने से पहले 'सहनशीलताÓ देते हैं। आज के समाज में सहनशीलता की कमी ही सभी दुखों का कारण है। जो व्यक्ति शिव की शरण में है, वह विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता।
3. विश्वास का अटूट बंधन: महाराज श्री ने कहा कि जब भक्त एक लोटा जल लेकर मंदिर जाता है, तो वह जल नहीं बल्कि अपना 'विश्वासÓ लेकर जाता है। जिसका भरोसा शिव पर अडिग है, उसे दुनिया की कोई ताकत नहीं झुका सकती।
सामाजिक एवं राष्ट्रभक्ति का संदेश
संस्कारों की नींव: पंडित श्री मिश्रा ने भावुक होकर कहा, 'जिस घर के बच्चे मंदिर की सीढ़ी चढ़ना शुरू कर देते हैं, उस घर के बुजुर्गों को कभी वृद्धाश्रम की सीढ़ी नहीं चढ़नी पड़ती। '
आत्मनिर्भर भारत: प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का समर्थन करते हुए उन्होंने भक्तों से स्वदेशी अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब हम खुद का काम करेंगे और स्वावलंबी बनेंगे, तो कोई देश हमें ठोकर नहीं मार सकेगा।
शिक्षा और सेवा: विठ्ठलेश सेवा समिति द्वारा कुबेरेश्वर धाम में 1000 बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा का प्रबंधन किया जा रहा है। महाराज श्री ने कहा कि शिव ही करने वाले हैं और वही करवाने वाले हैं।
भक्तों के पत्र और अनुभव
कथा के दौरान महाराज श्री ने एक नेत्र विहीन बेटी का पत्र पढ़ा, जिसने कंकड़-शंकर के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की। पंडित जी ने बताया कि कुबेरेश्वर धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों के विश्वास का केंद्र है। कथा का विश्राम 'तेरा शुक्रिया हैÓ भजन और महाआरती के साथ हुआ। इस अवसर पर पतंजलि फूड्स के एमडी राम भरत, आस्था चैनल के सीईओ प्रमोद जोशी, संस्कार चैनल के सीईओ मनोज त्यागी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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