सीहोर : लाखों शिव भक्तों ने देश भर में लगाए एक करोड़ा पौधे - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 15 फ़रवरी 2026

सीहोर : लाखों शिव भक्तों ने देश भर में लगाए एक करोड़ा पौधे

  •  80 क्विंटल फलहारी खिचड़ी और 50 क्विंटल से अधिक छाछ का श्रद्धालुओं को किया वितरण
  • ग्रीन शिवरात्रि का यह विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा

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सीहोर। जिला मुख्यालय स्थित सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के दूसरे दिन पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था और उत्साह के साथ शिव महापुराण का श्रवण किया। इस मौके पर सुबह नौ बजे अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने मंदिर परिसर में रुद्राक्ष से निर्मित भव्य शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन अर्चन किया और उसके पश्चात मंदिर परिसर में ग्रीन शिवरात्रि को लेकर वेलपत्र पौधों का रोपण किया उसके उपरांत देश भर में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं महाष्ट्र्र राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाना, पंजाब, हिमाचल प्रदेश बिहार आदि प्रदेशों में करीब एक करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया। रविवार को महाशिवरात्रि पर पौधा रोपण करते हुए पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि मानव जीवन पूर्ण रूप से स्वस्थ तभी होगा जब कदम-कदम पर पौधे लगेंगे। पौधरोपण जीवन के लिए बेहद जरूरी है। आक्सीजन देने वाले पौधों की महत्ता को दरकिनार नहीं किया जा सकता। हमें मुफ्त में आक्सीजन पेड़-पौधे ही देते हैं। बढ़ती जनसंख्या और घटते पेड़-पौधे मानव जीवन के अस्तित्व पर सवा खड़ा कर रहे हैं। पर्यावरण संतुलन से ही मानव सुरक्षित व खुशहाल रहेगा। भगवान शिव का संदेश भी प्रकृति से तालमेल रखने का है। कथा श्रवण करने वालों के लिए विठलेश सेवा समिति के द्वारा यहां पर श्रद्धालुओं के बैठने के लिए भव्य पंडालों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा रविवार को 80 क्विंटल से अधिक फलहारी खिचड़ी, 50 क्विंटल छाछ, 30 क्विंटल फलहारी मिक्चर, 25 क्विंटल से अधिक साबूदाने की खीर का समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा, आशीष वर्मा, आकाश शर्मा, यश अग्रवाल आदि ने किया। शिव महापुराण के दूसरे दिन पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि तुम्हारे दुख की घड़ी में भोले बाबा हमेशा खड़ा रहेगा। तुम्हारा कष्ट तुम्हें सहना है, कोई दूसरा नहीं सहेगा। परिवार वाले आएंगे, केवल शंकर जी को जल चढ़ाया है तो नंदी ही तुम्हारा दर्द बाटेंगे। देवाधिदेव महादेव पृथ्वी पर रहते हैं, वह तुम्हारे पास आएंगे तुम्हारा दुख हरने के लिए, लेकिन उसके लिए तुम्हें उन्हें दिल से पुकारना होगा। रविवार को पांच लाख से अधिक श्रद्धालु मंदिर परिसर सहित आस-पास मौजूद थे और पूरे भाव से कथा का श्रवण कर रहे थे। चार बड़े पंडालों के साथ-साथ श्रद्धालु खुले में पीछे तक बैठे नजर आए। पंडित मिश्रा को सीधे न देख पाने वाले भक्तों ने यहां पर लगी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कथा का श्रवण किया।


भक्ति, राष्ट्रवाद और पर्यावरण संरक्षण के त्रिवेणी संगम का साक्षी  

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समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि विठ्ठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा एवं रुद्राक्ष महोत्सव के दूसरे दिन कुबेरेश्वर धाम भक्ति, राष्ट्रवाद और पर्यावरण संरक्षण के त्रिवेणी संगम का साक्षी बना। पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज के आह्वान पर आज देश-दुनिया में करोड़ों अनुयायियों ने 'ग्रीन शिवरात्रिÓ मनाई। कथा के प्रारंभ में महाराज श्री ने ज्योतिर्लिंग वाटिका में 13 पौधों का रोपण कर प्रकृति सेवा का संदेश दिया।


कथा के दूसरे दिन मंच पर देश की कई प्रतिष्ठित विभूतियाँ उपस्थित रहीं।

पद्मश्री डॉ. उमाशंकर पाण्डेय (जल संरक्षण विशेषज्ञ): उन्होंने महाराज  के सामाजिक और पर्यावरणीय योगदान की तुलना राष्ट्र-ऋषि नानाजी देशमुख से की। डॉ. पाण्डेय ने सरकार से पुरजोर मांग करते हुए कहा,  'पंडित प्रदीप मिश्रा जिस निस्वार्थ भाव से जल और प्रकृति संरक्षण के लिए करोड़ों लोगों को जागरूक कर रहे हैं, इसके लिए उन्हें 'पद्म पुरस्कारÓ से सम्मानित किया जाना चाहिए। 'ग्रीन शिवरात्रिÓ का यह विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा। ' गोपाल आर्या राष्ट्रीय संयोजक, पर्यावरण गतिविधि उन्होंने मार्मिक कहानियों के माध्यम से भक्तों को समझाया कि प्रकृति की रक्षा ही धर्म की वास्तविक रक्षा है। उन्होंने महाराज के सामाजिक समर्पण की सराहना करते हुए इसे 'नव-जागरणÓ की संज्ञा दी। डॉ. यशदेव शास्त्री महामंत्री, पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास: उन्होंने पतंजलि परिवार की ओर से महाराज श्री का अभिनंदन किया और बताया कि कैसे पूज्य गुरुदेव की लोकप्रियता आज स्वदेशी और योग के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित हो रही है।


कथा के मुख्य आध्यात्मिक बिंदु: शिव तो श्वासों में हैं

पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने 'शिव महापुराणÓ के रहस्यों को खोलते हुए कहा कि भगवान शिव को ढूंढने के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है।

1. आत्मलिंग का बोध: महाराज श्री ने कहा,  आत्मा को ही लिंग कहते हैं, जिसे हमारे यहां आत्मलिंग कहा गया है। महादेव हमारी श्वासों के रूप में हमारे भीतर ही विराजमान हैं।

2. सहनशीलता ही असली वैभव: उन्होंने शिव चरित्र की व्याख्या करते हुए बताया कि महादेव अपने भक्त को धन-दौलत देने से पहले 'सहनशीलताÓ देते हैं। आज के समाज में सहनशीलता की कमी ही सभी दुखों का कारण है। जो व्यक्ति शिव की शरण में है, वह विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता।

3. विश्वास का अटूट बंधन: महाराज श्री ने कहा कि जब भक्त एक लोटा जल लेकर मंदिर जाता है, तो वह जल नहीं बल्कि अपना 'विश्वासÓ लेकर जाता है। जिसका भरोसा शिव पर अडिग है, उसे दुनिया की कोई ताकत नहीं झुका सकती।


सामाजिक एवं राष्ट्रभक्ति का संदेश

संस्कारों की नींव: पंडित श्री मिश्रा ने भावुक होकर कहा,  'जिस घर के बच्चे मंदिर की सीढ़ी चढ़ना शुरू कर देते हैं, उस घर के बुजुर्गों को कभी वृद्धाश्रम की सीढ़ी नहीं चढ़नी पड़ती। '

आत्मनिर्भर भारत: प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का समर्थन करते हुए उन्होंने भक्तों से स्वदेशी अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब हम खुद का काम करेंगे और स्वावलंबी बनेंगे, तो कोई देश हमें ठोकर नहीं मार सकेगा। 

शिक्षा और सेवा: विठ्ठलेश सेवा समिति द्वारा कुबेरेश्वर धाम में 1000 बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा का प्रबंधन किया जा रहा है। महाराज श्री ने कहा कि शिव ही करने वाले हैं और वही करवाने वाले हैं।


भक्तों के पत्र और अनुभव

कथा के दौरान महाराज श्री ने एक नेत्र विहीन बेटी का पत्र पढ़ा, जिसने कंकड़-शंकर के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की। पंडित जी ने बताया कि कुबेरेश्वर धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों के विश्वास का केंद्र है। कथा का विश्राम 'तेरा शुक्रिया हैÓ भजन और महाआरती के साथ हुआ। इस अवसर पर पतंजलि फूड्स के एमडी राम भरत, आस्था चैनल के सीईओ प्रमोद जोशी, संस्कार चैनल के सीईओ मनोज त्यागी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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