यूपी का प्रस्तुत 9.12 लाख करोड़ का बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की व्यापक परिकल्पना को धरातल पर उतारने का एक महत्वाकांक्षी दस्तावेज बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पेश यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार 2027 के राजनीतिक लक्ष्य और 2047 के विकसित भारत के विजन को साधने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। बजट में आधारभूत ढांचे, कृषि, उद्योग, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल देकर विकास की बहुआयामी तस्वीर पेश की गई है। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ मानते हुए एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, मेट्रो विस्तार और औद्योगिक कॉरिडोर पर बड़ा निवेश प्रस्तावित किया है। इससे प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। वहीं कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, सिंचाई परियोजनाओं और किसान हित योजनाओं के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रयास किया गया है। युवाओं के लिए कौशल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और रोजगारपरक योजनाएं बजट की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं, जो प्रदेश को ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ का लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर बढ़ा हुआ व्यय सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बजट आवंटन बढ़ाकर मानव संसाधन विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मतलब साफ है यह बजट सरकार की विकास-केन्द्रित छवि को और मजबूत करता है। हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बजट प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन, रोजगार सृजन की वास्तविकता और ग्रामीण आय में ठोस वृद्धि सरकार की सफलता का पैमाना तय करेंगे। कुल मिलाकर यह बजट प्रदेश को आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का सशक्त प्रयास कहा जा सकता है
इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, औद्योगिक विकास और डिजिटल शासन को प्राथमिकता देकर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति के आधार पर देश का नेतृत्व करने की तैयारी में है। योगी सरकार का यह बजट संदेश देता है कि मजबूत प्रशासन ही मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव बनता है। इस बजट की सबसे बड़ी ताकत इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश है। एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक कॉरिडोर, स्मार्ट शहर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर भारी निवेश प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट केवल सड़क नहीं हैं, बल्कि यह प्रदेश की आर्थिक धमनियां बन रहे हैं। 2027 के राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह विकास मॉडल सरकार को ‘परिणाम आधारित राजनीति’ का मजबूत आधार देता है। जनता अब घोषणाओं से ज्यादा धरातल पर दिखने वाले विकास को महत्व देती है और योगी सरकार उसी दिशा में काम करती दिखाई दे रही है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन : आस्था से अर्थव्यवस्था तक
अयोध्या, काशी, मथुरा और प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्रों के विकास को इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति भी है। काशी विश्वनाथ धाम और राम मंदिर परियोजना के बाद धार्मिक पर्यटन में जो वृद्धि हुई है, उसने हजारों लोगों को रोजगार दिया है। योगी सरकार इस मॉडल को पूरे प्रदेश में विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 2027 की राजनीति में यह मॉडल सरकार को सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास दोनों स्तरों पर मजबूत बनाता है।
किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाः आत्मनिर्भर गांव की दिशा
बजट में कृषि, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि गांवों को केवल कृषि आधारित नहीं, बल्कि बहुआयामी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र में बदला जाए। सिंचाई परियोजनाओं और कृषि आधुनिकीकरण से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास दिखाई देते हैं। यह बजट बताता है कि सरकार ग्रामीण विकास को केवल कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति के रूप में देख रही है। यह दृष्टिकोण 2027 में ग्रामीण मतदाताओं के विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
युवा शक्ति और स्टार्टअप क्रांति
उत्तर प्रदेश देश का सबसे युवा राज्य है और योगी सरकार ने इस बजट में युवाओं को भविष्य की अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाया है। आईटी पार्क, स्टार्टअप नीति, डिजिटल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा के विस्तार से यह संकेत मिलता है कि सरकार युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाना चाहती है। 2027 की राजनीति में युवा वर्ग निर्णायक भूमिका निभाने वाला है। इस बजट में युवाओं के लिए दी गई योजनाएं सरकार के दीर्घकालिक राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण को मजबूत करती हैं।
ऊर्जा और हरित विकास : आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का सपना
सौर ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर बढ़ता निवेश प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए यह नीति केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास की आधारशिला भी है। योगी सरकार यह संदेश देने में सफल दिखती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
जनपदों का संतुलित विकास : क्षेत्रीय राजनीति का समाधान
इस बजट की विशेषता यह भी है कि इसमें पूर्वांचल, पश्चिम उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और अवध क्षेत्रों के संतुलित विकास का प्रयास दिखाई देता है। पूर्वांचल में धार्मिक पर्यटन और कनेक्टिविटी, पश्चिम यूपी में औद्योगिक विकास, बुंदेलखंड में जल और ऊर्जा परियोजनाएं, अवध क्षेत्र में प्रशासनिक और सांस्कृतिक विकास, यह संतुलन सरकार को क्षेत्रीय असंतोष से बचाने और पूरे प्रदेश में विकास की समान छवि बनाने में मदद करता है।
2027 की राजनीतिक दिशा : विकास आधारित जनसमर्थन
यह बजट साफ संकेत देता है कि योगी सरकार 2027 के चुनाव को विकास और सुशासन के मुद्दों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। सरकार ने लोकलुभावन मुफ्त योजनाओं से दूरी बनाकर दीर्घकालिक आर्थिक निवेश पर जोर दिया है। यह राजनीतिक रूप से जोखिम भरा जरूर है, लेकिन यदि विकास परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो यह रणनीति सरकार के लिए मजबूत जनसमर्थन का आधार बन सकती है। 2027 का चुनाव संभवतः यह तय करेगा कि उत्तर प्रदेश में राजनीति लाभार्थी योजनाओं पर आधारित होगी या विकास मॉडल पर।
योगी की प्रशासनिक शैली और बजट की कार्यसंस्कृति
योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक शैली सख्ती, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए जानी जाती है। इस बजट में भी योजनाओं के साथ स्पष्ट लक्ष्य और समयसीमा दिखाई देती है। प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए उद्योगों को सुरक्षा और पारदर्शी नीतियां देने का प्रयास निवेशकों का विश्वास बढ़ाने में सफल रहा है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश निवेश आकर्षित करने वाले राज्यों की सूची में तेजी से आगे बढ़ा है।
विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला
उत्तर प्रदेश का बजट 2026-27 केवल आर्थिक योजना नहीं, बल्कि एक व्यापक विकास दृष्टि का दस्तावेज़ है। योगी सरकार ने इस बजट के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि ठोस रणनीति है। यह बजट दिखाता है कि सरकार 2027 को केवल चुनाव नहीं, बल्कि विकास की उपलब्धियों की परीक्षा के रूप में देख रही है। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से होता है तो यह बजट उत्तर प्रदेश को देश की आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकता है। विकास, सांस्कृतिक गौरव, निवेश और सुशासनकृइन चार स्तंभों पर खड़ा यह बजट योगी सरकार की दूरदृष्टि और राजनीतिक आत्मविश्वास दोनों का प्रमाण बनकर सामने आया है।
मध्यम वर्ग और शहरी मतदाता : मौन संतोष या बढ़ती नाराजगी?
मध्यम वर्ग के लिए बजट में कोई बड़ी राहत नहीं दिखाई देती। न टैक्स में छूट, न महंगाई से सीधे राहत की योजना। यह वर्ग राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में सरकार का भरोसा शायद इस बात पर है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की छवि इस वर्ग को संतुष्ट कर देगी। लेकिन अगर महंगाई और रोजमर्रा के खर्च बढ़ते रहे, तो यही वर्ग चुनावी नाराजगी का केंद्र भी बन सकता है। फिरहाल, अगर चुनावी बजट का मतलब मुफ्त योजनाओं की बाढ़ से लगाया जाए तो यह बजट वैसा नहीं है। लेकिन अगर चुनावी बजट का मतलब विकास की दृश्य राजनीति, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान, इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धियों का निर्माण, भविष्य के विज़न का प्रचार है, तो यह बजट निश्चित रूप से राजनीतिक रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है।
विकास का रास्ता या सियासी प्रयोग?
उत्तर प्रदेश का यह बजट विकास, निवेश और विज़न का दस्तावेज़ जरूर है, लेकिन यह सियासत से पूरी तरह अलग नहीं है। सरकार ने भविष्य की अर्थव्यवस्था का सपना दिखाया है, मगर जनता वर्तमान की राहत भी चाहती है। अब असली परीक्षा यह नहीं होगी कि बजट में क्या लिखा गया, बल्कि यह होगी कि क्या योजनाएं ज़मीन पर उतरेंगी? क्या हर जनपद को समान अवसर मिलेगा? क्या युवा और किसान इस विकास को महसूस करेंगे? क्योंकि लोकतंत्र में बजट केवल आर्थिक दस्तावेज़ नहीं होता यह जनता और सत्ता के बीच विश्वास की परीक्षा भी होता है।
सुरेश गांधी
वरिष्ठ पत्रकार
वाराणसी

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