111 मिनट की इस प्रस्तुति में 9 गायक, 6 नर्तक और 18 मौलिक रचनाएँ एक सशक्त नैरेटिव में गुंथी हुई थीं। भारतीय इतिहास, पौराणिक संकेतों और समकालीन यथार्थ से प्रेरित यह शो आध्यात्मिकता, पहचान, तकनीक और मानव चेतना जैसे गहन विषयों की परतें खोलता है। विशेष बात यह है कि जहाँ इसकी ऊर्जा Gen Z और Millennials से सीधे संवाद करती है, वहीं इसकी दार्शनिक गहराई वरिष्ठ दर्शकों को भी बराबर प्रभावित करती है। यही बहुस्तरीयता इसे “ज़िलेनियल युग” की आवाज़ बनाती है। एक ऐसी पीढ़ी जो डिजिटल है, पर जड़ों से भी जुड़ना चाहती है। मुंबई में छह विशाल स्क्रीन कहानी की लय के साथ खिसकतीं, विभाजित होतीं और पुनः एकाकार होती रहीं। प्रकाश और ध्वनि ने मिलकर मंच को एक जीवंत कैनवास में बदल दिया। दर्शकों की लंबी तालियाँ और भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ इस बात का प्रमाण थीं कि यह अनुभव पारंपरिक कॉन्सर्ट से कहीं आगे है।
प्रदर्शन के बाद हृतुल ने कहा, “मुंबई एक ऐसा शहर है जो सिनेमा और परफ़ॉर्मेंस को गहराई से समझता है। यहाँ पहली बार YOUFORIA लाना बेहद विशेष था। दर्शकों ने केवल देखा नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भागीदारी की, वही साझा ऊर्जा इस फ़ॉर्मेट को सार्थक बनाती है।” अहमदाबाद ने जहाँ इसे आधार दिया, वहीं मुंबई ने इसे विस्तार और नई पहचान दी। अब यह यात्रा अगले अध्याय की ओर बढ़ रही है — YOUFORIA Chp. कलियुद्ध, जिसका प्रीमियर 2026 में प्रस्तावित है। यह अध्याय इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप्स और पौराणिक प्रतीकों के माध्यम से “मानव चेतना के युद्ध” को एक नए संगीतात्मक आयाम में प्रस्तुत करेगा। प्रश्न अब यह नहीं कि YOUFORIA एक शो है या नहीं। प्रश्न यह है कि क्या यह भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आध्यात्मिक इमर्सिव अनुभवों का नया अध्याय लिख रहा है? यदि मुंबई की प्रतिक्रिया संकेत है, तो उत्तर शायद “हाँ” की ओर झुकता दिखाई देता है — क्योंकि YOUFORIA केवल देखा नहीं जाता, उसे महसूस किया जाता है… और शायद जिया जाता है।

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