- मोहनपुर मत्स्य हैचरी में पूर्वोत्तर किसानों ने जाना वैज्ञानिक मत्स्य पालन का रहस्य
- कृषि अनुसंधान परिसर, पटना के मार्गदर्शन में पूर्वोत्तर किसानों को मिला आधुनिक मत्स्य उत्पादन का व्यावहारिक अनुभव

पटना (रजनीश के झा), 24 फरवरी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर , पटना में पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों हेतु चार दिवसीय क्षमता निर्माण एवं आदान सहायता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के उत्तर-पूर्वी पर्वतीय घटक कोष द्वारा समर्थित था। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें असम, सिक्किम, त्रिपुरा, मेघालय एवं नागालैंड के 27 प्रगतिशील किसानों एवं उद्यमियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम के अंतर्गत नालंदा जिले स्थित मोहनपुर मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र का क्षेत्र भ्रमण कराया गया। भ्रमण के दौरान बीज केंद्र संचालक श्री शिवजी ने किसानों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मछली बीज उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझाते हुए बताया कि कतला, रोहू, मृगल एवं ग्रास कार्प जैसी प्रमुख प्रजातियों का प्रजनन किस प्रकार कराया जाता है। किसानों ने प्रत्यक्ष रूप से मत्स्य बीज उत्पादन की विभिन्न अवस्थाओं—फ्राई एवं फिंगरलिंग—को देखा तथा उनके पालन-पोषण में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। श्री शिवजी ने जल की गुणवत्ता, संतुलित आहार, रोग प्रबंधन एवं तालाब प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष बल दिया। इस अवसर पर डॉ. बिश्वजीत देबनाथ (वरिष्ठ वैज्ञानिक), डॉ. तारकेश्वर कुमार (वैज्ञानिक) तथा श्री अमरेंद्र कुमार (तकनीकी अधिकारी) भी उपस्थित रहे और किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। यह प्रक्षेत्र भ्रमण पूर्वोत्तर के किसानों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ, जिससे उन्हें मत्स्य पालन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में नई प्रेरणा प्राप्त हुई।
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