समारोह के आरम्भ में प्रो. आशीष त्रिपाठी को प्रशस्तिपत्र, अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और नकद धनराशि भेट कर सम्मानित किया गया। त्रिपाठी जी ने सम्मान राशि को आग्रहपूर्वक पुस्तकालय को समर्पित कर दिया।इस अवसर पर अपने वक्तव्य में आशीष त्रिपाठी ने आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके चेतना निर्माण में प्रगतिशील लेखक संघ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।उन्होंने कहा कि मुझे किसी विश्वविद्यालय ने नहीं बनाया बल्कि प्रलेस द्वारा आयोजित कार्यशालाओं, गोष्ठियों और इस तरह के आयोजनों के भीतर भागीदारी ने मेरे लेखकीय व्यक्तित्व का निर्माण किया है।आज यदि यह पुरस्कार मुझे मिल रहा है तो इसका श्रेय प्रो.नामवर सिंह, प्रो.कमला प्रसाद, डॉ.सेवाराम त्रिपाठी,प्रो.काशीनाथ सिंह जैसे कॉमरेडस को जाता है, जिनका सानिध्य मुझे मिला है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मैं अपनी स्वर्गीय दादी को समर्पित करता हूं जिनसे मुझे ईमानदारी और वसूलों पर टिके रहने की सीख मिली है। इस अवसर पर आयोजित जनसंवाद को भी प्रो.त्रिपाठी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 'आज साम्राज्यवाद एक नए चेहरे के साथ सामने है। यह बहुत सारे चेहरे के साथ आया। नव उपनिवेशवाद ने कट्टरता को जीवित कर दिया है। यह हर मुल्क में अपने अनुयायियों को खोज रहा है। आज दो दुनिया के बीच खाई बढ़ती जा रही है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।'
सम्मान समारोह के अवसर पर प्रगतिशील लेखक संघ उत्तर प्रदेश के महासचिव संजय श्रीवास्तव का लिखित पर्चा पढ़ा गया। लिखते हैं - 'आज जब हिन्दी आलोचना का परिदृश्य बदल रहा है, तब आशीष त्रिपाठी का लेखन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वे पाठ-केंद्रित और विचार-केंद्रित आलोचना के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। उनकी आलोचना में विचार और संवेदना का संतुलित रूप दिखाई देता है। वे आलोचना को केवल सिद्धांत नहीं मानते, बल्कि उसे जीवन के अनुभवों से जोड़ते हैं। समकालीन हिन्दी आलोचना में आशीष की उपस्थिति महत्वपूर्ण है। वे न केवल अपने समय की रचनाओं को नई दृष्टि से पढ़ते हैं बल्कि आलोचना की नई संभावनाओं को भी विकसित करते हैं। उनकी आलोचना में सामाजिक सरोकारों की गहरी उपस्थिति है। यही कारण है कि उनका लेखन युवा आलोचकों को प्रेरित करता है। निस्संदेह, नामवर सम्मान का प्राप्त होना उनके लेखन की स्वीकृति है। यह सम्मान हिन्दी आलोचना में उनके योगदान को रेखांकित करता है। आशीष त्रिपाठी की आलोचना में विचार और संवेदना का जो समन्वय दिखाई देता है, वह हिन्दी आलोचना को नई दिशा देता है।'
सम्मान समिति के संयोजक श्री राजेन्द्र राजन ने बताया कि प्रो. आशीष त्रिपाठी का चयन दिनांक 21 दिसंबर ,2025 को संचालन समिति की बैठक में किया गया। 2020 में प्रथम नामवर सम्मान प्रख्यात साहित्यकार आचार्य विश्वनाथ त्रिपाठी, दिल्ली को दिया गया। अब तक यह सम्मान श्री नरेश सक्सेना, (लखनऊ), प्रो. अवधेश प्रधान (वाराणसी), प्रो. शंभुनाथ (कोलकाता), प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ( दिल्ली) और प्रोफेसर ब्रजकुमार पांडेय (पटना) को प्रदान किया गया है। नामवर सिंह के शताब्दी वर्ष में यह सम्मान उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को सहेजने वाले कवि, आलोचक और संपादक आशीष त्रिपाठी को दिया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन नवेंदु प्रियदर्शी द्वारा किया गया। इस दौरान कार्यक्रम में प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक योगेन्द्र यादव, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्याँ द्रेज, पुस्तकालयाध्यक्ष रमेश प्रसाद सिंह, सचिव अवनीश राजन, कार्यकारी अध्यक्ष अमित रंजन भारती,कवयित्री निवेदिता झा के साथ ही शहर एवं देश के गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।

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