- भागवत को समझना भगवान को समझने के बराबर-महंत उद्धव दास महाराज
शुक्रवार को महंत उद्धव दास महाराज ने कहाकि कलयुग के प्रभाव से राजा परीक्षित ने तपस्या पर बैठे शमिक मुनि के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया था। इसे अपने पिता का अपमान समझकर शमिक मुनि के पुत्र श्रृंगी ऋषि ने सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से राजा की मौत होने का श्राप दे दिया। श्राप से व्यथित और अपने आप को मृत्यु के करीब जानकर राजा ने शुकदेव से पूछा कि मृत्यु के द्वार पर खड़े व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त करने के लिए कौन सा उपाय करने चाहिए। तो शुकदेव ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण, चिंतन, मनन करना चाहिए। कथा हमें जीवन का तरीका देती है, सत्संग और भगवान के जप से हमारे जीवन में अंधकार दूर होता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में पांच तरह से समस्याएं आती है। यह पांच समस्याएं संसार, संबंधों, संपत्ति, स्वास्थ्य और संतान है, जिनसे लड़ते-लड़ते हम देह त्याग देते है। जो इन समस्याओं को जीतकर प्रभु भक्ति में लीन रहता है, वो संसार में रहकर भी संसार को जीतकर साधु बन जाता है। इसके बाद व्यक्ति मोक्ष की तरफ अग्रसर होता है।

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