सीहोर : सात दिवसीय भागवत कथा का समापन आगामी 18 मार्च को - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 13 मार्च 2026

सीहोर : सात दिवसीय भागवत कथा का समापन आगामी 18 मार्च को

  • भागवत को समझना भगवान को समझने के बराबर-महंत उद्धव दास महाराज

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सीहोर। भागवत को समझना भगवान को समझने के बराबर है। जन्म-जन्मांतर व युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है। श्रीमद्भागवत कथा एक अमर कथा है। इसे सुनने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते हैं। इसके श्रवण से मानव जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है और यह लोक-परलोक सुधारने का सरल मार्ग है। उक्त विचार शहर के महिला घाट गंगेश्वर महादेव शनि मंदिर परिसर में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन महंत उद्धव दास महाराज ने कहे। जायसवाल परिवार के औंकार प्रसाद जायसवाल एवं समस्त सनातन प्रेमी भक्तजन तत्वाधान में शहर के महिला घाट गंगेश्वर महादेव शनि मंदिर परिसर नदी चौराहे पर सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन ब्रह्मलीन श्री त्यागी महाराज के शिष्य महंत उद्धव दास महाराज के मुखरविन्द द्वारा किया जा रहा है। कथा दोपहर दो बजे से आरंभ होती है। परिवार से सभी क्षेत्रवासियों से कथा का श्रवण करने की अपील की है।


 शुक्रवार को महंत उद्धव दास महाराज ने कहाकि कलयुग के प्रभाव से राजा परीक्षित ने तपस्या पर बैठे शमिक मुनि के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया था। इसे अपने पिता का अपमान समझकर शमिक मुनि के पुत्र श्रृंगी ऋषि ने सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से राजा की मौत होने का श्राप दे दिया। श्राप से व्यथित और अपने आप को मृत्यु के करीब जानकर राजा ने शुकदेव से पूछा कि मृत्यु के द्वार पर खड़े व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त करने के लिए कौन सा उपाय करने चाहिए। तो शुकदेव ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण, चिंतन, मनन करना चाहिए। कथा हमें जीवन का तरीका देती है, सत्संग और भगवान के जप से हमारे जीवन में अंधकार दूर होता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में पांच तरह से समस्याएं आती है। यह पांच समस्याएं संसार, संबंधों, संपत्ति, स्वास्थ्य और संतान है, जिनसे लड़ते-लड़ते हम देह त्याग देते है। जो इन समस्याओं को जीतकर प्रभु भक्ति में लीन रहता है, वो संसार में रहकर भी संसार को जीतकर साधु बन जाता है। इसके बाद व्यक्ति मोक्ष की तरफ अग्रसर होता है। 

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