खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए मंत्री विश्वास सारंग ने प्रेरणादायक संदेश दिया "कराटे केवल एक खेल नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सशक्त कला है, जो अनुशासन, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता का निर्माण करती है। आप सभी खिलाड़ी अपने समर्पण और मेहनत के प्रतीक हैं। जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है अपने लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयास करना, अपने प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करना और हर चुनौती का साहस के साथ सामना करना। मैं सभी प्रतिभागियों से आग्रह करता हूँ कि वे खेल भावना के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और देश का नाम रोशन करें। यहां सीखे गए मूल्य आपको भविष्य में एक मजबूत और जिम्मेदार नागरिक बनाएंगे।"
23 से 24 मार्च तक आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के 19 राज्यों से लगभग 450 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिन्होंने कुमिते और काता की विभिन्न श्रेणियों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धा की। इस अवसर पर डॉ. पंकज शुक्ला ने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा "यह चैंपियनशिप केवल पदक जीतने का मंच नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन और आत्मविश्वास को विकसित करने का अवसर है। हर खिलाड़ी यहां अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए देश की भावना को आगे बढ़ा रहा है। मैं सभी प्रतिभागियों से कहना चाहता हूँ कि वे इस मंच का उपयोग खुद को बेहतर बनाने, नई सीख हासिल करने और अपनी सीमाओं को पार करने के लिए करें। कराटे हमें जीत में विनम्रता और हार में साहस सिखाता है—यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। ‘श्रृंगार बने हथियार’ जैसी पहल के माध्यम से हम महिलाओं को भी सशक्त बना रहे हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर और निडर बन सकें।" यह आयोजन शिहान अमित गुप्ता एवं शिहान परितोष शर्मा के तकनीकी मार्गदर्शन तथा शिहान जयदेव शर्मा के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उत्कृष्ट व्यवस्थाओं ने आयोजन को सुचारू और प्रभावशाली बनाया। इस चैंपियनशिप ने भोपाल को राष्ट्रीय खेल आयोजनों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करते हुए युवाओं में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया।

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