- वाराणसी में सामने आया साइबर ठगी का नया तरीका | कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए कुछ ही मिनटों में अकाउंट पर कब्जा | जागरूकता से टला बड़ा नुकसान
कूरियर का फोन और शुरू हुआ जाल
गुरुवार की शाम लगभग पांच बजे एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को नामी कूरियर कंपनी ब्लू डार्ट का कर्मचारी बताया और कहा कि आपके नाम से एक पार्सल आया था, लेकिन डिलीवरी के समय आप घर पर नहीं मिले। चौंकाने वाली बात यह थी कि कॉल करने वाले का नंबर ट्रूकॉलर पर भी ब्लू डार्ट के नाम से ही दिखाई दे रहा था, जिससे उसकी बात पर भरोसा करना स्वाभाविक लगा। कॉलर ने कहा कि पार्सल की डिलीवरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए मोबाइल में एक छोटा-सा कोड डायल करना होगा। उसने एक मैसेज भेजा और उसमें लिखे कोड को डायल करने के लिए कहा। वह कोड था — *21*8102723870# सामान्य व्यक्ति के लिए यह केवल एक तकनीकी प्रक्रिया जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यही वह क्षण था जब साइबर अपराधियों का खेल शुरू हो गया।
कॉल फॉरवर्डिंग से हुआ खेल
जैसे ही यह कोड डायल किया गया, मोबाइल में कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई। इसका मतलब था कि अब उस मोबाइल नंबर पर आने वाली कॉल—विशेषकर वेरिफिकेशन कॉल या ओटीपी—सीधे अपराधी के नंबर पर जाने लगी। इसके बाद अपराधी ने उसी नंबर से व्हाट्सएप लॉगिन करने की कोशिश की। व्हाट्सएप वेरिफिकेशन के लिए जब कॉल आया तो कॉल फॉरवर्डिंग के कारण वह सीधे हैकर के फोन पर पहुंच गया। कुछ ही मिनटों में व्हाट्सएप अकाउंट पूरी तरह अपराधियों के कब्जे में चला गया।
परिचितों को भेजे गए इमरजेंसी संदेश
व्हाट्सएप पर कब्जा करने के बाद अपराधियों ने संपर्क सूची में मौजूद लोगों को संदेश भेजने शुरू कर दिए। इन संदेशों में दुर्घटना या आपात स्थिति का हवाला देकर तुरंत पैसे भेजने की मांग की जा रही थी। क्योंकि संदेश परिचित व्यक्ति के नंबर से जा रहा था, इसलिए कई लोग इसे सच मान बैठे। हालांकि एक करीबी परिचित को संदेश संदिग्ध लगा और उसने फोन कर स्थिति की जानकारी ली। तभी यह स्पष्ट हुआ कि व्हाट्सएप अकाउंट हैक हो चुका है।
तुरंत दर्ज कराई गई शिकायत
मामला सामने आते ही वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी ने तुरंत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को सचेत किया गया कि उनके नंबर से यदि किसी प्रकार का संदेश या पैसे की मांग आए तो उस पर भरोसा न करें। इसके बाद कॉल फॉरवर्डिंग कोड की जांच कर उसे तुरंत बंद किया गया और व्हाट्सएप को दोबारा इंस्टॉल कर वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी की गई। करीब बारह घंटे के प्रयास के बाद अकाउंट दोबारा सुरक्षित हो सका।
क्यों खतरनाक है यह तरीका
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें अपराधी किसी जटिल हैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं करते। वे केवल मोबाइल नेटवर्क की एक सामान्य सुविधा—कॉल फॉरवर्डिंग—का दुरुपयोग करते हैं। लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि 21 जैसे डायल कोड उनके फोन की कॉल व्यवस्था को बदल सकते हैं। अपराधी इसी अनभिज्ञता का फायदा उठाते हैं।
छोटे शहर बन रहे आसान निशाना
साइबर अपराधों के मामलों में छोटे शहर और कस्बे तेजी से निशाने पर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सेवाओं का विस्तार तो तेजी से हुआ है, लेकिन डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता उसी गति से नहीं बढ़ पाई है। यही वजह है कि साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल उपयोगकर्ता आसान लक्ष्य बनते जा रहे हैं।
सावधानी : इन बातों का रखें ध्यान
▪ किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई कोड डायल न करें।
▪ ओटीपी या वेरिफिकेशन कॉल की जानकारी किसी से साझा न करें।
▪ बैंक, कूरियर या सरकारी संस्थाएं फोन पर कोड डायल करने को नहीं कहतीं।
▪ संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत फोन काट दें।
▪ व्हाट्सएप में टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखें।
साइबर ठगी की शिकायत ऐसे करें
▪ साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930
▪ वेबसाइट: www.cybercrime.gov.in�
यहां शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस और साइबर विशेषज्ञ मामले की जांच करते हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
आज मोबाइल फोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। यह हमारी पहचान, संपर्क, बैंकिंग और निजी जानकारी का केंद्र बन चुका है। ऐसे में इसकी सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितनी घर की सुरक्षा। कूरियर के बहाने आया एक फोन कॉल और एक छोटा-सा डायल कोड किसी का भी व्हाट्सएप अकाउंट अपने कब्जे में लेने के लिए काफी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि लोग सतर्क रहें, अनजान कॉल से सावधान रहें और किसी के कहने पर मोबाइल में कोई तकनीकी कोड डायल करने से पहले पूरी जानकारी अवश्य लें। डिजिटल युग में सुरक्षा की सबसे मजबूत दीवार जागरूकता और सतर्कता ही है।

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