कविता : सपनों को हकीकत बनाती मेरी कलम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 29 मार्च 2026

कविता : सपनों को हकीकत बनाती मेरी कलम

Megha-ganv-ki-awaz
अपने सपनों को आज शब्दों में ढाल दूँ,

अपनी कलम से हर ख्वाब को सजा लूँ,

जो अरमान छुपे हैं दिल की गहराइयों में,

उन्हें कागज़ पर खुलकर बिखेर दूँ,

दूर कहीं निकल जाऊँ खुले आसमान में,

जहाँ मेरे पंख किसी डर से बंधे न हों,

इस कदर फैलाऊँ अपनी उड़ान को,

कि हर सीमा भी छोटी लगे तूफान में,

आजादी को सिर्फ महसूस ही नहीं,

नया इतिहास लिखते देखना चाहती हूँ,

जो बंद आँखों में देखा है मैंने सपना,

उसे हकीकत में बदलना चाहती हूँ,

अगर एक लड़की के मन में हिम्मत हो,

हौसला और पूरे मन से जब जज़्बा हो,

तो कदम भी साथ मिलकर चलते हैं और,

एक दिन मंजिल तक पहुँच ही जाते हैं।।





मेघा

उम्र 18

उत्तराखंड

टीम गांव की आवाज 

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