वाराणसी : ईरान-इजरायल युद्ध के साए के बीच वैकल्पिक ईंधन की तैयारी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 17 मार्च 2026

वाराणसी : ईरान-इजरायल युद्ध के साए के बीच वैकल्पिक ईंधन की तैयारी

  • पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने की पहल : ढाबों, रेस्टोरेंट और लघु उद्योगों को मिलेगा विकल्प
  • वन विभाग की बैठक : आमजन और छोटे उद्योगों को विभागीय दर पर मिलेगी जलौनी लकड़ी

Lpg-scarcity-varanasi
वाराणसी (सुरेश गांधी). मध्य-पूर्व के खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग तथा वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में वन एवं वन्यजीव विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में सोमवार को वृत्त कार्यालय वाराणसी में वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह की अध्यक्षता में मंडलीय बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई, जिसमें वन निगम और वन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में उत्तर प्रदेश वन निगम के प्रभागीय विक्रय प्रबंधक तौफीक अहमद ने जानकारी दी कि वाराणसी जोन के सात प्रमुख प्रकाष्ठ डिपो में वर्तमान समय में कुल 1407.2391 घनमीटर जलौनी लकड़ी उपलब्ध है। यह लकड़ी प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, वाराणसी, जौनपुर और गाजीपुर जिलों के डिपो में रखी गई है, जिसे आमजन तथा लघु उद्योग नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से खरीद सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रयागराज के मेजा और मऊआइमा डिपो में सबसे अधिक 487.90 घनमीटर लकड़ी उपलब्ध है। इसके अलावा जौनपुर डिपो में 352.04 घनमीटर, प्रतापगढ़ के तवंकलपुर डिपो में 208.79 घनमीटर, वाराणसी के रतनबाग डिपो में 159.50 घनमीटर, कौशाम्बी के फतेहपुर डिपो में 171 घनमीटर तथा गाजीपुर के नंदगंज डिपो में 28 घनमीटर जलौनी लकड़ी उपलब्ध है।


वन निगम अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जलौनी लकड़ी का आधार मूल्य 405 रुपये प्रति घनमीटर निर्धारित किया गया है, जबकि सामान्य नीलामी के माध्यम से आमजन इसे 866 रुपये प्रति घनमीटर की दर से खरीद सकते हैं। डिपो में उपलब्ध लकड़ी में बबूल, सागौन, जामुन और शीशम जैसी उच्च कैलोरी मान वाली प्रजातियां भी पर्याप्त मात्रा में हैं, जो लघु उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए उपयोगी हैं। बैठक में वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह ने वन निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि आमजन को राहत देने के लिए नीलामी प्रक्रिया में छूट प्रदान करते हुए आधार मूल्य पर विभागीय दर से जलौनी लकड़ी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता बनी रहे। इसके अलावा प्रभागीय वनाधिकारी वाराणसी, सामाजिक वानिकी वन प्रभाग गाजीपुर और जौनपुर के प्रभागीय निदेशकों तथा काशी वन्यजीव प्रभाग रामनगर (चंदौली) के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि लाइसेंसी आरा मशीनों के माध्यम से लकड़ी की चिरान कराकर आमजन को विभागीय दरों पर जलौनी लकड़ी उपलब्ध कराई जाए। वन विभाग का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देना आवश्यक है। विभाग की इस पहल से जहां छोटे उद्योगों, ढाबों और रेस्टोरेंट संचालकों को ईंधन के रूप में एक सुलभ विकल्प मिलेगा, वहीं आम नागरिकों को भी किफायती दरों पर जलौनी लकड़ी उपलब्ध हो सकेगी।

कोई टिप्पणी नहीं: