सीहोर : मरीह माता मंदिर में आज रात्रि बारह बजे की जाएगी महानिशा आरती और नवमीं पर विशाल भंडारा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 25 मार्च 2026

सीहोर : मरीह माता मंदिर में आज रात्रि बारह बजे की जाएगी महानिशा आरती और नवमीं पर विशाल भंडारा

  • कालरात्रि माता को देवी दुर्गा के नौ रूपों में से सातवां स्वरूप कहा गया-मनोज दीक्षित मामा

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सीहोर। शहर के विश्राम घाट स्थित चौसट योगिनी मरीह माता मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी चैत्र नवरात्रि का पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। प्रतिदिन कन्या भोज का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर श्रद्धालुओं के द्वारा प्रतिदिन बड़ी संख्या में कन्याओं की पूजा अर्चना के भोजन प्रसादी का वितरण के पश्चात तिलककर कन्याओं का सम्मान किया गया। वहीं बुधवार को सुबह महिला मंडल के तत्वाधान में भजन-कीर्तन का आयोजन के साथ सुबह हवन किया गया था, साथ ही यहां पर मौजूद मंदिर के व्यवस्थापक गोविन्द मेवाड़ा, रोहित मेवाड़ा, जितेन्द्र तिवारी अन्य ने देवी का सोलह श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात मां कालरात्रि माता का आह्वान किया। गुरुवार को प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी रात्रि बारह बजे महानिशा आरती की जाएगी और नवमीं को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।


जिला संस्कार मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि कालरात्रि माता को देवी दुर्गा के नौ रूपों में से सातवां स्वरूप कहा गया है। नवरात्र के सातवें दिन माता के इसी स्वरूप को ध्यान में रखकर इनकी पूजा की जाती है। देवी का यह नाम उनके स्वरूप के कारण से है। इस स्वरूप में माता का वर्ण काजल के समान काला है। कथा है कि शुंभ-निशुंभ और उसकी सेना को देखकर देवी को भयंकर क्रोध आया और इनका वर्ण श्यामल हो गया। इसी श्यामल स्वरूप से देवी कालरात्रि का प्राकट्य हुआ। देवी के कालरात्रि की चार भुजाएं हैं। ऊपर की दाहिनी भुजा से माता भक्तों को वर प्रदान करती हैं और नीचली दायीं भुजा से अभय देती हैं जबकि बायीं भुजाओं में माता खड्ग और कंटीला मूसल धरण करती हैं। कहीं-कहीं माता के हाथों में खड्ग और कटोरी भी बताया जाता है। माता कालरात्रि के बाल खुले हुए हैं और गले में विद्युत की माला शोभा पा रही है जिसकी चमक से ऐसे प्रतीत होता है कि बिजली चमक रही हो। क्रोध में माता की नासिका से अग्नि धधकती है। माता कालरात्रि का वाहन गर्दभ है। माता कालरात्रि के इस भंयकर स्वरूप को देखकर असुर और नकारात्मक शक्तियां भयभीत होती हैं। लेकिन माता कालरात्रि भक्तों पर परम अनुकंपा दर्शाने वाली हैं। भक्तों के लिए सुलभ और ममतामयी होने की वजह से माता को शुभंकरी भी कहा गया है। उन्होंने बताया कि गुरुवार की सुबह महागौरी की विशेष पूजा अर्चना के पश्चात रात्रि बारह बजे महानिशा की आरती का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर श्मशान घाट के समीप स्थित माता मंदिर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल रहेगे। 

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