- आज मंदिर परिसर में पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा
जिला संस्कार मंच के संयोजक मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि मंदिर परिसर में हर नवरात्रि पर प्रतिदिन देवी की पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना की जाती है। शिव और शक्ति के मिलन से ही इस संसार में कल्याण होता है। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के चतुर्थ दिन शक्ति कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। देवी कुष्मांडा कुंडली में नीच के बुध को नियंत्रित करती हैं तथा अनाहत चक्र को नियंत्रित करती है। मां कुष्मांडा को कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय होने के कारण भी इनका नाम कूष्मांडा पड़ा. देवी कुष्मांडा की पूजा अर्चना करके नौकरी व्यापार तथा नाक कान गले से संबंधित बीमारियां दूर होती है। देवी कुष्मांडा की विशेष पूजा से वाणी प्रभावित होती है और आपकी वाणी द्वारा कार्य सिद्ध होता है। नौ देवियों के साथ हर रोज दस महाविद्याओं का भी आह्वान किया जाता है। उन्होंने बताया कि काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल है। प्रवृति के अनुसार दस महाविद्या के तीन समूह हैं। पहला सौम्य कोटि (त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, कमला), दूसरा उग्र कोटि (काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, तीसरा सौम्य-उग्र कोटि (तारा और त्रिपुर भैरवी)। मंदिर में पूजा अर्चना आदि का क्रम जारी है। हर साल बड़ी संख्या में यहां पर श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते है। यहां पर चारों नवरात्रि पर माता की पूजा अर्चना की जाती है।

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