प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने असम के गुवाहाटी से आयोजित कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों एवं अन्य हितधारकों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर कई विकास योजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया गया तथा अनेक परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जिससे कृषि और ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। उन्होंने चाय बागानों से जुड़े किसानों और श्रमिकों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई तथा यह भी कहा कि किसानों को उर्वरक उचित एवं रियायती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि ही देश की प्रगति का आधार है और “विकसित भारत–2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। साथ ही उन्होंने बताया कि इस बार योजना के अंतर्गत 2 करोड़ से अधिक महिला किसानों को भी सीधे लाभ प्राप्त हुआ है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इससे पूर्व, संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने मुख्य अतिथि दीघा विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक डॉ. संजीव चौरसिया तथा उपस्थित किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि आज का दिन देश के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत किसानों के खातों में 22वीं किस्त जारी की जा रही है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आजीविका को सुदृढ़ बनाएं। कार्यक्रम से पहले किसानों ने संस्थान के विभिन्न अनुसंधान प्रक्षेत्रों का भ्रमण कर वहाँ चल रहे शोध कार्यों और नवीन कृषि तकनीकों को नज़दीक से देखा। इस कार्यक्रम में पटना, गया जी और राँची से लगभग150 किसानों सहित 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। किसानों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें नवीनतम कृषि तकनीकों की जानकारी के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के बारे में भी प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है।

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