ऐतिहासिक पांडेय हवेली स्थित बंगाली टोला इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बंगीय समाज के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। काशी में बसे बंगाली परिवार बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर जुटे और प्रधानमंत्री के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना। इस अवसर पर काशी की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का अनूठा उदाहरण भी देखने को मिला, जहां बंगाल की सांस्कृतिक छाया बनारस की परंपरा के साथ सहज रूप से घुलती नजर आई। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ‘वंदे मातरम्’ गीत के साथ हुई। जैसे ही प्रधानमंत्री के संबोधन का लाइव प्रसारण आरंभ हुआ, उपस्थित लोगों ने गंभीरता से उनके विचारों को सुना। वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है और काशी भी इस परिवर्तन का साक्षी बन रही है। वक्ताओं ने कहा, काशी केवल धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक समन्वय की भूमि भी है, जहां देश के विभिन्न प्रांतों के लोग अपनी परंपराओं के साथ रहते हुए काशी की संस्कृति में रच-बस जाते हैं। बंगीय समाज भी काशी की इसी बहुरंगी सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम के दौरान काशी में निवास कर रहे बंगीय समाज के उन प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने समाजसेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। सम्मानित होने वालों में पूर्णिमा दास, चंदा चटर्जी, उद्योगपति देव भट्टाचार्य, बंगीय समाज के सचिव देवाशीष दास तथा चंद्रनाथ मुखर्जी शामिल रहे। इन्हें अभिषेक मिश्रा और आशुतोष पॉल ने अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और माल्यार्पण कर सम्मानित किया। सम्मानित व्यक्तियों के प्रति उपस्थित लोगों ने तालियों की गूंज के साथ अपनी खुशी और सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक भाजयुमो काशी क्षेत्र के महामंत्री आशुतोष पॉल तथा स्थानीय पार्षद चंद्रनाथ मुखर्जी थे। कार्यक्रम का संचालन अमित राय ने किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के विचारों को समाज और राष्ट्रनिर्माण के संदर्भ में जोड़ते हुए कहा कि देश के विकास में जनभागीदारी ही सबसे बड़ी शक्ति है। धन्यवाद ज्ञापन पार्षद चंद्रनाथ मुखर्जी (चादू दादा) ने किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और काशी सहित पूरे देश को इसका लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि काशी आज विकास और सांस्कृतिक समन्वय का जीवंत उदाहरण बन चुकी है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की प्रगति पर गर्व व्यक्त करते हुए आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों को बधाई दी। काशी में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह शहर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय की भी जीवंत मिसाल है। कार्यक्रम में बंगीय समाज के अनेक गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से तरुण मुखर्जी, विश्वजीत शास्त्री, देव भट्टाचार्य, आसित कुमार दास, देवाशीष दास, श्रीमती चंद्र चटर्जी, आशुतोष पॉल, नवरतन राठी, कन्हाई चंद्र तालापात्र, कार्तिक नदी, तनुश्री मुखर्जी, सरवानी धारा, नंदिता चटर्जी, अनीता, मंडल अध्यक्ष सोमनाथ यादव सहित अनेक लोग मौजूद रहे। इसके अलावा पार्षदों में चंद्रनाथ मुखर्जी, रामगोपाल वर्मा, विजय द्विवेदी, चल्लू यादव, अभिषेक मिश्रा, अमित कुमार सिंह, चंदन दास गुप्ता, शैलेन्द्र मिश्रा, असित दास, रीना पात्रों और अनुज नाग सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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