- श्रीमद्भागवत भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सार-महंत उद्धव दास महाराज
उन्होंने कहाकि जिस प्रकार रामायण हमें जीना सिखाती है, महाभारत हमें रहना और गीता हमें कार्य करने का उपदेश देती है उसी प्रकार भागवत कथा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह हमें मरना सिखाती है। हमें जीवन के अंत समय में किस तरह और क्या कार्य करने चाहिए इस कथा से सीखने को मिलता हैं। कथा के पहले दिन उन्होंने तीन अध्यायों के माध्यम से जीवन प्रबंधन के बारीक गुर सिखाएं। जीवन में आने वाली समस्याओं से भागता है, उसे समस्याएं अपने नजदीक खींच लेती है इसलिए भागवत उपदेश देती है की समस्याओं से भाग मत यानी इन समस्याओं पर विजय प्राप्त करे। शनिवार को कथा के तीसरे दिन भगवान राम के नाम के प्रभाव के बारे में बताया कि राम ने तो केवल एक अहिल्या का उद्धार किया पर रामजी के नाम सुमिरन से करोड़ों जीवों का कल्याण हो गया। राम सेतु निर्माण के समय भगवान का नाम लिखने से पत्थर भी तैर जाते हैं। रामजी के भजन के साथ माता, पिता, सास, ससुर की सेवा करें, यही सच्चा पुण्य है। जिसके साथ कोई नहीं होता है, उसके साथ ईश्वर होता है। शबरी बनकर बैठों राम अवश्य मिलेगा। दया धर्म का मूल है, जब हमारे अंदर दया और विनम्रता आती है, तभी हमें भगवान की प्राप्ति होती है। विनम्रता मनुष्य के व्यक्तित्व का आभूषण है। इसके माध्यम से हमारा व्यक्तित्व खूबसूरत बनता है, क्योंकि विनम्र होकर ही हम पात्रता अर्जित कर सकते हैं। विनम्र होकर हम ग्रहण करना सीखते हैं और विनम्रता के कारण ही हम दूसरों से जुड़ पाते हैं। भारतीय संस्कृति में इसी विनम्रता को व्यक्त करने के लिए प्रणाम और अभिवादन करने की परंपरा है।

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