सीहोर : पुनर्वसु नक्षत्र में शुक्रवार को मनाई जाएगी श्री रामनवमी : पंडित सुनील शर्मा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 24 मार्च 2026

सीहोर : पुनर्वसु नक्षत्र में शुक्रवार को मनाई जाएगी श्री रामनवमी : पंडित सुनील शर्मा

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सीहोर। त्रेता युग में धर्म ध्वजा स्थापित करने के लिए जगत पालक भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर सातवें अवतार में श्रीराम के रूप में जन्म लिया था । भगवान श्री राम का जन्मोत्सव रामनवमी सनातन हिंदू धर्म में अपना एक विशेष महत्व रखता है। रामनवमी के समय ही प्राकृतिक सौंदर्य व ऋतु परिवर्तन देखने को मिलता है। भगवान श्री राम दरबार का प्रतिदिन पूजा करने से सुख शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है और उसके समस्त प्रकार के संकट भगवान श्री हरि हर लेते है। पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि शास्त्र अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि में मध्यान्ह काल में हुआ था।इस बार यह अवसर 27 मार्च शुक्रवार को पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि इस मुहूर्त को सभी दोसो का नाशक व सर्व सिद्धि प्रदायक माना गया है l महाशक्ति पर्व नवरात्रि की नवमी  तिथि व भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के कारण यह दिन अमृतमय  बन जाता है lभगवान श्री राम ने सत्य व  धर्म के मार्ग पर चलकर सनातन धर्म को स्थापित किया l भगवान श्री राम ने लंका विजय व रावण को पराजित करने के लिए जगत जननी मां दुर्गा की शक्ति उपासना की और महाशक्ति मां दुर्गा ने प्रसन्न होकर भगवान श्री राम को विजय श्री का शक्ति आशीर्वाद प्रदान किया l श्री रामनवमी के अवसर पर पूरे जिले भर में मंदिरों में अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे l और जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा अपने घर पर बंधन बार व रंगोली बनाकर अपनी खुशी व्यक्त करेंगे। पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं को शुक्रवार को मध्यान्ह काल में अभिषेक पूजा अर्चना करना चाहिए lभगवान को तुलसी दल, कमल पुष्प,खीर मिष्ठान आदि  भैट करना चाहिए और दिनभर राम राम सीता राम का जाप करें l श्री रामचरितमानस सुंदरकांड श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से मनुष्य को विशेष फल की प्राप्ति होती है l श्री रामनवमी का पर्व दान पुण्य के लिए विशेष महत्व रखता है इसलिए गौ सेवा,जरूरतमंदों को अन्न,वस्त्र दान करना चाहिए इस दिन किया हुआ दान व पूजा अक्षय फल प्रदान करता है।

                            

संघर्ष को बनाया श्री राम ने वरदान-      

भगवान श्री राम ने अपने वनवास काल के जरिए मनुष्य को सीख दी कि उसे किसी भी विपरीत परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए और धैर्य से मर्यादा पूर्ण कार्य करना चाहिए l भगवान श्री राम ने संघर्ष में शांति पूर्ण जीवन जीने की शिक्षा दी l  वनवास में भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण व  सीताजी के साथ तपस्वी पूर्ण जीवन व्यतीत कर जन्म मानस को एक नवीन संदेश दिया lभगवान श्री राम ने भारत निर्माता के रूप में एक नया आयाम स्थापित किया और वानर राज सुग्रीव, भगवान हनुमान के सहयोग से लंका पर विजय प्राप्त की l भगवान श्री राम ने 14 वर्ष के वनवास काल में सभी जातियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया।

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