- तेल व एलपीजी संकट की आहट से थाली से ठेला तक बढ़ी चिंता, जंग की आंच, जेब पर वार, महंगाई की मार
- चाय-नाश्ते से सब्जी तक बढ़ सकते हैं दाम, ठेला-खुमचा वालों की चेतावनी : “सिलेंडर और डीजल बढ़ा तो 10 की चाय 15 करनी पड़ेगी”
थाली से ठेला तक महंगाई का डर
महंगाई का सबसे पहला असर रोजमर्रा के छोटे कारोबारों पर पड़ता है। चाय की दुकान, समोसे-कचौड़ी का ठेला, नाश्ते के खोमचे और सड़क किनारे के ढाबे, इन सबका खर्च सीधे गैस और ईंधन पर निर्भर होता है। कॉमर्शियल सिलेंडरों की कमी के कारण चाय-नाश्ते की दुकानों और छोटे रेस्तरां को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वाराणसी के सिगरा क्षेत्र में चाय का ठेला लगाने वाले राजेश कुमार कहते हैं, “पहले ही सिलेंडर महंगा है, अगर और बढ़ा तो 10 रुपये वाली चाय 15 रुपये करनी पड़ेगी। नहीं तो दुकान चलाना मुश्किल हो जाएगा।” जहां पहले 10 रुपये में मिलने वाली चाय अब 15 या 20 रुपये में मिलने लगी है, वहीं नाश्ते की प्लेट और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़ गए हैं। कुछ दुकानदारों का कहना है कि गैस सिलेंडर महंगा होने के कारण उन्हें अपनी कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। इसी तरह भेल-पूरी का ठेला लगाने वाले गुड्डू साहनी कहते हैं कि बाजार में पहले ही आलू, तेल और मसाले महंगे हो चुके हैं। “अगर डीजल और गैस बढ़ा तो सामान की ढुलाई भी महंगी हो जाएगी। ऐसे में हमें भी रेट बढ़ाना पड़ेगा।”
सब्जी और राशन पर भी पड़ेगा असर
व्यापारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से सबसे पहले सब्जियों और खाद्यान्न की ढुलाई महंगी हो जाती है। मंडी से बाजार तक सब्जियां ट्रकों और छोटे वाहनों से आती हैं। डीजल महंगा होने पर परिवहन खर्च बढ़ जाता है, जिसका असर सीधे खुदरा कीमतों पर दिखाई देता है। फल-सब्जी विक्रेता रामदास गुप्ता बताते हैं “डीजल महंगा हुआ तो ट्रांसपोर्टर तुरंत किराया बढ़ा देते हैं। इसका असर ग्राहक पर ही पड़ता है। सब्जी के दाम बढ़ाना मजबूरी हो जाती है।”
होटल और रेस्तरां उद्योग की चिंता
एलपीजी संकट का असर होटल और रेस्तरां उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। कई रेस्तरां ने अपने मेनू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। कुछ जगहों पर व्यंजनों की संख्या कम कर दी गई है, जबकि कुछ जगहों पर थाली के दाम बढ़ा दिए गए हैं। कुछ रेस्तरां अब गैस की जगह इलेक्ट्रिक तंदूर और इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल करने लगे हैं। होटल उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो कई होटल और रेस्तरां बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। ढाबा संचालक शिवकुमार यादव कहते हैं, “खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन ग्राहक उतना ही पैसा देना चाहता है। अगर गैस और डीजल बढ़ा तो थाली के दाम बढ़ाना ही पड़ेगा।”
जमाखोरी और कालाबाजारी का भी खतरा
तेल संकट या महंगाई की आशंका के समय बाजार में जमाखोरी और कालाबाजारी का खतरा भी बढ़ जाता है। अतीत में कई बार देखा गया है कि कुछ व्यापारी आवश्यक वस्तुओं का भंडारण कर लेते हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो जाती है और कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं। खाद्य तेल, दाल, चीनी और गैस सिलेंडर जैसे सामानों में ऐसी स्थिति पैदा होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
आम आदमी की बढ़ती चिंता
महंगाई का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है। गैस सिलेंडर, दूध, सब्जी, राशन, बच्चों की पढ़ाई और बिजली के बिल जैसे खर्च पहले से ही बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि ईंधन की कीमतें और बढ़ती हैं तो घरेलू बजट और बिगड़ सकता है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा चिंता पैदा करने वाली है।
प्रशासन की नजर बाजार पर
महंगाई और संभावित कालाबाजारी को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही तेल कंपनियां भी आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं ताकि बाजार में किसी तरह का संकट न पैदा हो।

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