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शुक्रवार, 13 मार्च 2026

आलेख : एक डायल कोड और कैद हो गया व्हाट्सएप

डिजिटल दौर में मोबाइल फोन जितना सुविधा का साधन बना है, उतना ही साइबर अपराधियों के लिए आसान हथियार भी। हाल के दिनों में एक नया साइबर जाल तेजी से फैल रहा है, जिसमें कूरियर डिलीवरी या अन्य बहाने से फोन कर लोगों से एक विशेष डायल कोड डलवाया जाता है और कुछ ही मिनटों में उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया जाता है। यह तरीका तकनीकी हैकिंग से ज्यादा मनोवैज्ञानिक चाल पर आधारित है, जहां अपराधी लोगों की सहजता और तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए व्हाट्सएप वेरिफिकेशन कॉल अपने नंबर पर प्राप्त कर वे अकाउंट पर कब्जा कर लेते हैं और फिर परिचितों को इमरजेंसी या दुर्घटना का संदेश भेजकर पैसे मांगते हैं। हाल ही में सामने आई एक घटना ने इस खतरे को उजागर किया है और यह साबित किया है कि डिजिटल दुनिया में थोड़ी-सी असावधानी भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है


Whatsapp-cyber-fraud
जी हां, कूरियर के बहाने कॉल, स्टार ’21हैज कोड का जाल और मिनटों में हैक हुआ अकाउंट. यह साइबर ठगी का नया हथकंडा है. मतलब साफ है डिजिटल क्रांति ने दुनिया को हमारी हथेली में समेट दिया है। बैंकिंग से लेकर खरीदारी, संवाद से लेकर सरकारी सेवाएं, सब कुछ आज स्मार्टफोन के माध्यम से संभव हो गया है। लेकिन तकनीक जितनी सुविधा दे रही है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराध का दायरा भी बढ़ रहा है। आज साइबर अपराधी न तो बैंक लूटने के लिए बंदूक उठाते हैं और न ही किसी घर में सेंध लगाते हैं। वे केवल एक फोन कॉल और कुछ तकनीकी चालों के जरिए लोगों की निजी जानकारी और डिजिटल पहचान पर कब्जा कर लेते हैं। इसी तरह की एक घटना ने साइबर अपराध के एक नए तरीके को उजागर किया है, जिसमें कूरियर का बहाना बनाकर लोगों से एक विशेष डायल कोड डलवाया जाता है और कुछ ही मिनटों में उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक हो जाता है।


कूरियर का फोन और शुरू हुआ जाल

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घटना की शुरुआत एक सामान्य फोन कॉल से हुई। एक व्यक्ति ने खुद को नामी कंपनी ब्लू डार्ट कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताते हुए कहा कि आपके नाम से एक पार्सल आया था, लेकिन डिलीवरी के समय आप घर पर नहीं मिले। खास यह है कि उक्त तथाकथित कर्मचारी का नंबर ट्रू कालर भी ब्लू डार्ट के नाम से ही शो कर रहा था. जो विश्वसनीयता की मूल वजह बन गयी. वैसे भी आज के दौर में ऑनलाइन खरीदारी और कूरियर सेवाओं का उपयोग इतना सामान्य हो गया है कि ऐसा फोन आना किसी को भी असामान्य नहीं लगता। कॉलर ने कहा कि डिलीवरी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मोबाइल में एक छोटा-सा कोड डायल करना होगा। इसके लिए उसने एक मैसेज भेजा और उसमें लिखे कोड को डायल करने के लिए कहा। वह कोड था : स्टार’21’स्टार 8102723870.हैज. सामान्य व्यक्ति के लिए यह एक तकनीकी प्रक्रिया जैसा लगता है। लेकिन वास्तव में यही वह बिंदु था जहां से साइबर अपराधियों का खेल शुरू हो गया।


कॉल फॉरवर्डिंग और व्हाट्सएप पर कब्जा

जैसे ही यह कोड डायल किया गया, मोबाइल फोन में कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई। इसका अर्थ था कि अब उस मोबाइल नंबर पर आने वाली कॉल, विशेषकर वेरिफिकेशन कॉल और ओटीपी सीधे अपराधी के नंबर पर जाने लगी। इसके बाद अपराधी ने उसी नंबर से व्हाट्सएप लॉगिन करने की प्रक्रिया शुरू की। जब व्हाट्सएप वेरिफिकेशन कॉल आया, तो कॉल फॉरवर्डिंग के कारण ओटीपी कॉल सीधे हैकर के फोन पर पहुंच गया। कुछ ही मिनटों में व्हाट्सएप अकाउंट पूरी तरह अपराधियों के कब्जे में चला गया।


फिर शुरू हुआ ठगी का सिलसिला

व्हाट्सएप अकाउंट हैक करने के बाद अपराधी सबसे पहले संपर्क सूची को खंगालते हैं। वे लोगों को ऐसे संदेश भेजते हैं जो भावनात्मक रूप से तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर कर दें, जैसे :- “एक्सीडेंट हो गया है, तुरंत पैसे चाहिए।” “अस्पताल में भर्ती हूं, मदद करें।” “तुरंत यूपीआई से कुछ पैसे भेज दीजिए।” क्योंकि संदेश परिचित व्यक्ति के नंबर से आता है, इसलिए कई लोग बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए पैसे भेज देते हैं। देश के कई राज्यों में इस तरीके से हजारों और लाखों रुपये की ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। खास यह है कि मामला सीनियर पत्रकार सुरेश गांधी का था, लिहाजा एक खास परिचित एवं शुभचिंतक ने फोन कर हालचाल जानने के बहाने समस्या का जिलक्र करते हुए पूछा, क्या आपने कोई वाट्स्प भेजा है, जवाब मिला नहीं. तो उस व्यक्ति ने वाट्स्प पर आएं मैसेज यानी डिमांड को साझा किया. पत्रकार ने बिना किसी देर के पुलिस के सीनियर अधिकारियों के बाद साइबर क्राइम 1930 पर शिकायत दर्ज करा दी. मामला तब और संगीन हो गया जब पत्रकार का वाट्स्प भी नहीं खुल रहा था. ऐसे में पत्रकार ने तत्काल सूक्ष्म सूचना सोशल मीडिया पर प्रसारित कर लोगों को आगाह कर दिया और पूरी रात इस मामले की पड़ताल में खुद जुटे रहे.


समय रहते जागरूकता से बचा बड़ा नुकसान

इस मामले में समय रहते स्थिति समझ में आ गई। कॉल फॉरवर्डिंग कोड की जांच की गई और उसे तुरंत बंद कर दिया गया। इसके बाद व्हाट्सएप को दोबारा इंस्टॉल कर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की गई। करीब बारह घंटे के प्रयास के बाद अकाउंट दोबारा सुरक्षित हो गया। इसके साथ ही साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई और पूरे मामले को सार्वजनिक कर लोगों को सावधान करने का निर्णय लिया गया।


क्यों खतरनाक है यह साइबर तरीका

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें अपराधी किसी तकनीकी हैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं करते। वे केवल मानव मनोविज्ञान और तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। लोगों को यह भी पता नहीं होता कि एक साधारण-सा डायल कोड उनके फोन की कॉल व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है।


तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध

भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक गंभीर है क्योंकि वहां डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता अभी सीमित है। साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल फोन उपयोगकर्ता एक आसान लक्ष्य बनते जा रहे हैं।


सावधानी : इन बातों का हमेशा रखें ध्यान

▪ किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई कोड डायल न करें। विशेष रूप से : 21, 62, 67…

▪ ओटीपी या वेरिफिकेशन कॉल की जानकारी किसी से साझा न करें।

▪ बैंक, कूरियर या सरकारी संस्था कभी फोन पर कोड डायल करने को नहीं कहती।

▪ संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत फोन काट दें।

▪ व्हाट्सएप में टू स्टेप वेरीफिकेशन जरूर सक्रिय करें।


साइबर अपराध से बचाव के 7 नियम

अनजान नंबर से आए कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी न दें।

मोबाइल में आने वाले लिंक पर बिना जांच क्लिक न करें।

मोबाइल में मजबूत पासवर्ड या स्क्रीन लॉक रखें।

व्हाट्सएप और अन्य ऐप्स को समय-समय पर अपडेट करें।

सार्वजनिक वाईफाई का उपयोग सावधानी से करें।

बैंकिंग या ओटीपी से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत शिकायत करें।


शिकायत कैसे करें

साइबर अपराध की शिकायत के लिए भारत सरकार ने विशेष हेल्पलाइन और पोर्टल शुरू किया है।

साइबर हेल्पलाइन नंबर  : 1930

वेबसाइट : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.साइबर क्राइम.जीओवी.इन पर शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस और साइबर विशेषज्ञ मामले की जांच करते हैं।


जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

आज मोबाइल फोन केवल संवाद का साधन नहीं है। यह हमारी पहचान, संपर्क, बैंकिंग, सामाजिक जीवन और निजी जानकारी का केंद्र बन चुका है। ऐसे में इसकी सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितनी घर की सुरक्षा। साइबर अपराधियों की चालें लगातार बदल रही हैं, लेकिन उनसे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है, सतर्कता और जागरूकता। मतलब साफ है कूरियर के बहाने आया एक फोन कॉल और एक छोटा-सा डायल कोड, बस इतना ही काफी था किसी का व्हाट्सएप अकाउंट अपने कब्जे में लेने के लिए। लेकिन समय रहते जागरूकता और सही कदम उठाने से स्थिति को संभाल लिया गया। यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। डिजिटल युग में सुरक्षा की सबसे मजबूत दीवार जानकारी, सावधानी और सतर्कता ही है। संदेश स्पष्ट है : अनजान कॉल से सावधान रहें, किसी के कहने पर मोबाइल में कोड डायल न करें और साइबर अपराध के प्रति जागरूक रहें।


साइबर अपराध का नया “सॉफ्ट टारगेट”

साइबर अपराधियों की नजर में सबसे आसान शिकार वे लोग होते हैं जो : तकनीकी जानकारी कम रखते हैं. मोबाइल का उपयोग तो करते हैं लेकिन सुरक्षा सेटिंग्स नहीं जानते. अनजान कॉल या संदेशों पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में यह खतरा और अधिक है, क्योंकि वहां डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूकता अभी सीमित है।


पत्रकारिता की जिम्मेदारी

ऐसे मामलों में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जब किसी व्यक्ति के साथ हुई घटना सार्वजनिक होती है, तो हजारों लोग उससे सीख लेते हैं। साइबर अपराध पर रिपोर्टिंग केवल अपराध की खबर नहीं होती, बल्कि यह जन-जागरूकता का अभियान भी होती है। अखबारों, टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को इस विषय पर लगातार जानकारी और सावधानी के संदेश प्रकाशित करने चाहिए।


रिश्तों की आड़ में ठगी का जाल

डिजिटल दौर में जहां मोबाइल और सोशल मीडिया ने रिश्तों को पहले से अधिक करीब कर दिया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इन्हीं रिश्तों और विश्वास को ठगी का नया हथियार बना लिया है। पूर्वांचल, विशेषकर वाराणसी और आसपास के जिलों में इन दिनों व्हाट्सऐप हैकिंग से जुड़ा एक नया साइबर फ्रॉड तेजी से फैल रहा है। इस ठगी का तरीका इतना चालाक और भावनात्मक है कि कई लोग बिना सोचे-समझे इसके शिकार बन जा रहे हैं। दरअसल साइबर अपराधी पहले किसी व्यक्ति का व्हाट्सऐप अकाउंट हैक या अस्थायी रूप से ब्लॉक कर लेते हैं। इसके बाद उसी नंबर और पहचान का इस्तेमाल करते हुए उसके रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों को संदेश भेजा जाता है। संदेश में आमतौर पर किसी दुर्घटना, अस्पताल में भर्ती होने या अचानक पैसों की जरूरत का हवाला देकर तत्काल मदद मांगी जाती है। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया जब हैकर ने एक व्यक्ति के मोबाइल नंबर और नाम का उपयोग करते हुए उसके बेहद करीबी रिश्तेदार से 47 हजार रुपये की मदद मांगी। संदेश में बताया गया कि अचानक दुर्घटना हो गई है और तुरंत पैसों की जरूरत है। सौभाग्य से उस रिश्तेदार ने पैसे भेजने से पहले फोन कर सत्यता की पुष्टि कर ली। जब असली व्यक्ति को इसकी जानकारी मिली तो वह खुद हैरान रह गया। घटना यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद दर्जनों लोगों के फोन आने लगे कि उसी नंबर से उन्हें भी सहायता राशि मांगने के संदेश मिले हैं। इस तरह के कई लोग इस साइबर ठगी के जाल का निशाना बन रहे हैं।


पूर्वांचल में तेजी से फैल रहा साइबर अपराध का नया ट्रेंड बन चुका है

जांच करने पर यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल में तेजी से फैल रहा साइबर अपराध का नया ट्रेंड बन चुका है। साइबर अपराधियों की इस चालाकी का सबसे बड़ा कारण यह है कि वे लोगों की भावनाओं और भरोसे का फायदा उठाते हैं। जब किसी परिचित के नंबर से ‘एक्सीडेंट हो गया है’, ‘अस्पताल में हूं’, ‘तुरंत पैसे चाहिए’ जैसे संदेश आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से लोग बिना ज्यादा सोचे मदद करने की कोशिश करते हैं। कई बार लोग जल्दबाजी में ऑनलाइन ट्रांसफर भी कर देते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। पूर्वांचल में बढ़ते इस तरह के मामलों ने यह साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अब सीधे लोगों के बैंक खाते नहीं बल्कि उनके भरोसे और रिश्तों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि हम डिजिटल दुनिया में भी उतने ही सावधान रहें जितने वास्तविक जीवन में रहते हैं। याद रखें, कोई भी सच्चा परिचित यदि संकट में होगा तो वह केवल संदेश भेजकर पैसे नहीं मांगेगा। इसलिए किसी भी तरह के ‘इमरजेंसी मैसेज’ पर तुरंत भरोसा करने के बजाय पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें। यही सतर्कता आपको और आपके रिश्तों को साइबर ठगों के जाल से बचा सकती है।




Suresh-gandhi


सुरेश गांधी

वरिष्ठ पत्रकार 

वाराणसी

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