- “एक दौड़, एक संकल्प, एक गंगा” : काशी ने दिया जीवंत संदेश
- नमो घाट से तुलसीघाट तक उमड़ा जनसैलाब, ‘रन फॉर क्लीन गंगा मैराथन-2026’ बना जनआंदोलन
काशी की गलियों से गुजरा जागरूकता का कारवां
10.55 किमी की मैराथन का मार्ग अपने आप में काशी की सांस्कृतिक आत्मा को समेटे रहा, नमो घाट से प्रारंभ होकर मछोदरी, विश्वेश्वरगंज, मैदागिन, गोदौलिया, मदनपुरा, शिवाला, रवीन्द्रपुरी, लंका, महामना मालवीय प्रतिमा होते हुए अस्सी और अंततः तुलसीघाट तक यह दौड़ केवल दूरी नहीं, बल्कि संदेश तय करती रही। वहीं 7 किमी वर्ग के प्रतिभागियों ने नमो घाट से शिवाला होते हुए भदैनी के रास्ते तुलसीघाट तक अपनी ऊर्जा और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। तुलसीघाट पर जब प्रतिभागियों का स्वागत गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा के बीच हुआ, तो यह दृश्य केवल एक समापन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का संकेत दे रहा था, स्वच्छता की नई सोच, जिम्मेदारी की नई राह।
उत्साह, प्रतिस्पर्धा और सम्मान का संगम
मैराथन के दोनों वर्गों : 7 किमी और 10.55 किमी, में महिला और पुरुष प्रतिभागियों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। 10.55 किमी वर्ग में विजेताओं को क्रमशः 21 हजार, 16 हजार और 11 हजार रुपये नकद पुरस्कार दिए गए, जबकि 7 किमी वर्ग में यह राशि 15 हजार, 10 हजार और 7 हजार रुपये रही। प्रतियोगिता में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि गंगा की स्वच्छता का दायित्व अब केवल प्रशासन या संस्थाओं तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग, विशेषकर मातृशक्ति ने इसे अपना अभियान बना लिया है।
जब संदेश बना संकल्प
मुख्य अतिथि मिलिंद सोमन ने कहा, “जैसे हम अपने शरीर को स्वस्थ रखते हैं, वैसे ही गंगा को भी स्वच्छ रखना हमारी जिम्मेदारी है। यह केवल एक नदी नहीं, हमारी जीवनरेखा है।” संकट मोचन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. एसएन उपाध्याय ने पर्यावरण संरक्षण को मानव अस्तित्व से जोड़ते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों को बचाना ही भविष्य की सुरक्षा है। वहीं ‘मदर्स फॉर मदर’ की अध्यक्ष आभा मिश्र ने जल संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए मातृशक्ति से आगे आने का आह्वान किया। फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने बताया कि इस वर्ष 2642 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक रही। उन्होंने अपील की, “यदि हम संकल्प लें कि गंगा में एक बूंद भी अवजल नहीं जाने देंगे, तो वह दिन दूर नहीं जब गंगा पुनः निर्मल और अविरल होगी।”
आयोजन से जनआंदोलन तक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और स्टाइडर्स के सहयोग से आयोजित इस मैराथन ने यह साबित कर दिया कि जब समाज जागता है, तो परिवर्तन अवश्य होता है। यह आयोजन अब केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि काशी की आत्मा में समाया एक जनआंदोलन बन चुका है, जहां हर कदम गंगा के प्रति श्रद्धा, जिम्मेदारी और भविष्य की आशा को व्यक्त करता है।
विजेताओं की झलक
7 किमी वर्ग महिला : रेबि पॉल (प्रथम), किरण वर्मा (द्वितीय), छाया भारती (तृतीय).
पुरुष : आशीष पाल (प्रथम), कुलदीप यादव (द्वितीय), अभिषेक कुमार (तृतीय).
10.55 किमी वर्ग महिला : तामसी सिंह (प्रथम), वंदना (द्वितीय), खुशबू पटेल (तृतीय).
पुरुष : संदीप पाल (प्रथम), प्रिंस राज मिश्र (द्वितीय), आकाश पटेल (तृतीय).

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