इन प्रस्तावों में शत्रुता तत्काल समाप्त करने, यथाशीघ्र शांति वार्ता शुरु करने, गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा और नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की प्रमुखता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना शामिल है। दोनों नेताओं की वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य, अपने निकटवर्ती जलक्षेत्र के साथ, माल और ऊर्जा के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक नौवहन मार्ग है। पाकिस्तानी मीडिया ने संयुक्त बयान का हवाला देते हुए बताया, "चीन और पाकिस्तान सभी पक्षों से होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, नागरिक और वाणिज्यिक जहाजों को शीघ्र और सुरक्षित मार्ग प्रदान करने और जलडमरूमध्य से सामान्य आवागमन को जल्द से जल्द बहाल करने का आह्वान करते हैं।" इससे पहले चीन ने कहा कि तेल लेकर आ रहे उसके तीन जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और उसने इसकी सुविधा और समन्वय के लिए संबंधित पक्षों को धन्यवाद दिया। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां एक प्रेसवार्ता में ईरान का नाम लिए बिना कहा कि संबंधित पक्षों के समन्वय के बाद हाल ही में तीन चीनी जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम संबंधित पक्षों की सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।’’
ईरान वर्तमान में खाड़ी से जलडमरूमध्य पार करने वाले तेल के जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित कर रहा है। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग कर रहा है। माओ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास का जलक्षेत्र अंतरराष्ट्रीय माल और ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि चीन खाड़ी में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए शत्रुता तत्काल समाप्त करने का आह्वान करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन वर्षों से ईरानी तेल का एक बड़ा आयातक रहा है। चीन ने अपने जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के बारे में पहली बार बात की। ऐसी खबरें हैं कि ईरान घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों को देखते हुए चीनी जहाजों को जलडमरूमध्य पार करने दे रहा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से, चीन सभी देशों से सैन्य अभियान तुरंत रोकने का आह्वान कर रहा है। चीन होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने का भी आह्वान कर रहा है, क्योंकि इसके बंद होने से ईंधन आपूर्ति में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हुआ है। ईरान पर हुए हमलों की निंदा करते हुए, चीन 14-15 मई को होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा की तैयारी भी कर रहा है, जिस दौरान दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिये जाने की उम्मीदें बहुत अधिक हैं।

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