- भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में उमड़ा आस्था का सैलाब
श्री महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना की और मेहंदी, सिंदूर और अनार के दाने से श्री यंत्र की अर्चन
संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि प्राचीन सिद्धपीठ पर भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का दिव्य अनुष्ठान वैशाख महापर्व का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर यहां पर आधा दर्जन से अधिक विप्रजनों के द्वारा सुबह हवन यज्ञ से पूर्व सभी ने श्री महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना की और मेहंदी, सिंदूर और अनार के दाने से श्री यंत्र की अर्चन की और दोपहर में हवन में वेद मंत्रों के साथ आहुतियां दी गई। यज्ञाचार्य पंडित कुणाल व्यास सहित अन्य ने मंगलवार को भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के श्री यंत्र की अर्चन की। महालक्ष्मी की वंदना से श्रद्धालुओं को मां लक्ष्मी की कृपा से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी कृपा प्राप्ति के लिए श्रीयंत्र का सरल पूजन विधान है जिसकी सहायता से साधारण व्यक्ति भी विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस यंत्र को तांबे, चांदी और सोने किसी भी धातु पर बनाया जा सकता है। ऐसी मान्यता है कि श्रीयंत्र, मां लक्ष्मी का प्रिय यंत्र है, इसीलिए इसकी पूजा करने से देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। घर में विधि-विधान के साथ श्रीयंत्र की पूजा और अराधना करने से घर में सुख-संपत्ति, सौभाग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। लेकिन इसकी स्थापना और पूजा करने के लिए कुछ बातों को मानना बेहद जरूरी है। धन की देवी मां लक्ष्मी को कहा गया है, जिसकी पूजा सनातन धर्म में लक्ष्मी प्राप्ति के लिए सर्वोपरि है। हर कोई पूरी विधि विधान के साथ देवी लक्ष्मी और गणेश की पूजा अर्चना करते हैं, ताकि उनकी कृपा बनी रहे। मां लक्ष्मी होगी प्रसन्न, क्योंकि हर देवी देवता के लिए सनातन धर्म में अलग-अलग तरह के मंत्र होते हैं जो आपकी राशि और मुहूर्त के हिसाब से आपके ऊपर आने वाली बाधाओं को दूर करती है।

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