कृषि व्यापारी संघ के सूरेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि सोमवार 27 अप्रैल को पूरे देश के कृषि आदान व्यापारी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहे। पिछले 10 सालों से लगातार हमें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकारों के सम्बंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दिए है लेकिन समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया। व्यापारियों की मांग है कि उर्वरक निर्माता कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अनुपयोगी उत्पादों की जबरन लिंकिंगÓ को अपराध घोषित किया जाए और उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय की तर्ज पर पूरे देश में अनुदानित उर्वरक के साथ गैर-अनुदानित उत्पाद बेचने की बाध्यता पर रोक लगाई जाए। खाद की डिलीवरी डीलर के विक्री केंद्र तक कंपनियों द्वारा सुनिश्चित कराई जाए। यूरिया जैसे खाद की डिलीवरी टेल-हेड पर दी जा रही है, डीलरों को प्रति बैग 40 से 50 रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है इस रोक लगाई जाए। बढ़ती लागत और महंगाई को देखते हुए उर्वरकों पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8 प्रतिशत किया जाए। ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए इस पोर्टल को वैकल्पिक बनाया जाए और इसकी अनिवार्यता केवल निर्माताओं एवं थोक विक्रेताओं तक सीमित रखी जाए।अवैध बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगे या अधिकृत डीलरों को विनियमित बिक्री की अनुमति दी जाए। खाद, बीज एवं कीटनाशक के सीलबंद पैकिंग में नमूना फेल होने पर विक्रेता को अपराधी नहीं, बल्कि केवल गवाह माना जाए। चूंकि विक्रेता जिला कृषि अधिकारी से प्राप्त लाइसेंस के आधार पर केवल सीलबंद माल बेचता है गुणवत्ता की पूर्ण जिम्मेदारी कंपनी की होनी चाहिए।
कंपनियों के लिए पुराने यम एक्सपायर्ड स्टॉक को वापस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए, नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर को प्रथम पक्ष बनाने के कठोर प्रावधान को शिथिल किया जाए।जांच कमेटी बनाई जावे किसानों द्वारा झूठी शिकायतें करते हुए व्यापारियों को ब्लैकमेल किया जाता है। ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करने के पहले जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई जावे उसके अनुशंसा के बाद ही कार्रवाई की जाए। छोटी-मोटी बातों पर उप संचालक कृषि द्वारा लाइसेंस निलंबित किए जाने पर 21 दिन में स्वत: बहाली का प्रावधान किया जाए। हर साल क्कष्ट जोडऩे की अनिवार्यता समाप्त हो खाद एवं बीज के लाइसेंस की अवधि 5 वर्ष एवं कीटनाशक के लाइसेंस आजीवन है ऐसी स्थिति में हर साल कीटनाशक कंपनी के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोडऩे की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए और दोहरी लायसेंस प्रथा बन्द हो कई राज्यों में अनाज और उद्यानिकी के बीजों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की प्रक्रिया है जबकि बीज अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है इस प्रथा को समाप्त किया जाए सहित अनेक मांगे की गई है। समस्याओंं का निराकरण नहीं होने पर कृषि आदान व्यापारियों को मजबूरी में अनिश्चितकालीन करनी होगी। जिससे देश के कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव होने के साथ-साथ किसानों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

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