- हिंदू जनजागृति समिति ने डीएम के जरिए मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय महिला आयोग को भेजा पत्र
- बहुराष्ट्रीय कंपनियों में धार्मिक दबाव और भेदभाव का मुद्दा उठाया
ज्ञापन में कई ठोस और सख्त कदम उठाने की मांग की गई है,
1. एसआईटी जांच की मांग : पूरे मामले की जांच राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीइाईडी) के अनुभवी अधिकारियों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) से कराने की मांग की गई है। जांच का दायरा केवल यौन उत्पीड़न तक सीमित न रखकर ‘लव जिहाद’, ‘धार्मिक आतंक’ और संगठित कॉर्पोरेट अपराध तक बढ़ाने की बात कही गई है।
2. भर्ती प्रक्रिया की जांच : सभी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया (रिक्वायरमेंट) की जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं किसी विशेष समुदाय को प्राथमिकता देकर सुनियोजित तरीके से हिंदू महिलाओं को निशाना तो नहीं बनाया जा रहा।
3. आईसीसी और प्रबंधन पर कार्रवाई : जिन कंपनियों ने अपनी आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को निष्क्रिय रखा या शिकायतों को दबाया, उनके सीईओ और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के खिलाफ ‘क्रिमिनल नेग्लिजेंस’ के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
4. राष्ट्रीय महिला आयोग का हस्तक्षेप : राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) से इस मामले में स्वतः संज्ञान (सो काल फार मोटो) लेने और देशभर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए नई ‘कंप्लायंस गाइडलाइंस’ जारी करने की अपील की गई है।
वाराणसी में व्यापक समर्थन
इस दौरान वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा, महामंत्री कवींद्र जायसवाल, चौसरिया व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुनील चौसरिया सहित कई सामाजिक और अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
डिजिटल व्यसन पर भी उठी आवाज
ज्ञापन में विद्यार्थियों में बढ़ती ‘डिजिटल लत’ (डिजिटल एडिक्शन) को भी गंभीर समस्या बताते हुए उत्तर प्रदेश में ‘स्क्रीन टाइम पॉलिसी’ लागू करने की मांग की गई है। समिति का कहना है कि मोबाइल और इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग से बच्चों के मानसिक और शैक्षिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

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