इसके बाद मुख्यमंत्री ने बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्ल्यू) पहुंचकर प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रम स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओंकृसुरक्षा, मंच, आगंतुक प्रबंधन और यातायात नियंत्रणकृको बारीकी से परखा और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप सभी तैयारियां समयबद्ध और उच्च स्तर की होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान शासन और प्रशासन के कई वरिष्ठ चेहरे मौजूद रहे। इनमें श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, स्टाम्प राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, महापौर अशोक तिवारी, विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, मंडलायुक्त एस राजलिंगम, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, एडीजी जोन पियूष मोर्डिया, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित अनेक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें काशी की आस्था, परंपरा और जनसरोकारों की झलक भी स्पष्ट दिखाई दी। एक ओर जहां उन्होंने प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रम को लेकर पूरी प्रशासनिक मशीनरी को सतर्क और सक्रिय किया, वहीं दूसरी ओर आम जन, खासकर मासूम बच्चों से उनका सहज संवाद इस दौरे को विशेष बना गया।
वाराणसी (सुरेश गांधी). मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंगलवार को काशी दौरा आस्था, प्रशासनिक सख्ती और मानवीय संवेदनाओं का संगम बन गया। दो दिवसीय प्रवास के तहत वाराणसी पहुंचे मुख्यमंत्री ने सबसे पहले सर्किट हाउस में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा बैठक की। बैठक में सुरक्षा, यातायात, जनसुविधाओं और कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री सीधे काशी की आध्यात्मिक धुरी की ओर बढ़े और श्री कालभैरव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर बाबा कालभैरव का आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के चरणों में शीश नवाया। काशी की परंपरा के अनुसार यह दर्शन-पूजन उनके दौरे का आध्यात्मिक केंद्र रहा। दर्शन के बाद मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय मुख्यमंत्री का एक बेहद मानवीय और आत्मीय रूप देखने को मिला। माला-फूल की दुकान पर बैठी एक छोटी बच्ची को देखकर वे ठहर गए और उसे स्नेहपूर्वक दुलारने लगे। इस दृश्य को देखकर उसकी बड़ी बहन भी उत्सुकता से आगे आ गई। मुख्यमंत्री ने दोनों बच्चियों से बातचीत करते हुए उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा और उन्हें मन लगाकर पढ़ने का आशीर्वाद दिया। साथ ही उन्होंने परिजनों से भी संवाद कर उनका हालचाल जाना। यह क्षण वहां मौजूद लोगों के लिए यादगार बन गया।

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