दरभंगा : कम पानी में ज्यादा फसल का मंत्र, दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज में गूंजी नई सोच - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

दरभंगा : कम पानी में ज्यादा फसल का मंत्र, दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज में गूंजी नई सोच

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दरभंगा (रजनीश के झा), 07 अप्रैल। दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय में आज मंगलवार को “जल जीवन हरियाली दिवस” कार्यक्रम के अंतर्गत “कम पानी में अधिक उत्पादन: कृषि नवाचारों से बदलता परिदृश्य” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पौधारोपण एवं पौधों को जल अर्पित कर पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ किया गया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. आई. सी. ठाकुर एवं डीन अकादमी डॉ. शशि भूषण ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिवादन करते हुए कार्यशाला को विधिवत प्रारंभ किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री मोना ऋचा, उप परियोजना निदेशक, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), दरभंगा उपस्थित रहीं। साथ ही अन्य अतिथि के रूप में श्री कमलेश कुमार सिंह, उप परियोजना निदेशक, आत्मा, दरभंगा एवं सुश्री नेहा चौधरी, सहायक निदेशक, भूमि संरक्षण, दरभंगा ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई ।


मुख्य अतिथि सुश्री मोना ऋचा ने स्मार्ट सिंचाई एवं बेहतर योजना के माध्यम से “More Crop per Drop (हर बूंद से अधिक फसल)” के महत्वपूर्ण सिद्धांत को वीडियो एवं प्रदर्शन के जरिए छात्रों को विस्तार से समझाया। उन्होंने सरकार की विभिन्न लाभकारी योजनाओं एवं नीतियों—जैसे ड्रिप सिंचाई पर सब्सिडी, किसान जागरूकता कार्यक्रम, जल संरक्षण योजनाएं तथा सतत खेती के लिए सरकारी सहयोग—की भी जानकारी दी। संस्थान के प्राचार्य डॉ. चन्दन कुमार ने अपने संबोधन में छात्रों को कृषि क्षेत्र में नवाचार अपनाने, तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नेटवर्किंग के माध्यम से आधुनिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. आई. सी. ठाकुर ने अपने उद्बोधन में वर्तमान जल संकट की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन एवं पारंपरिक खेती पद्धतियों के कारण जल संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कम पानी में अधिक उत्पादन आज की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिंचाई एवं माइक्रो-सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों से कृषि के स्वरूप को बदला जा सकता है, जिसका बिहार में बड़े स्तर पर क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए छात्रों एवं किसानों में जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य है। साथ ही इस क्षेत्र में स्टार्ट-अप से छात्र नौकरी खोजने वाले के बजाय नौकरी देने वाला बन सकता है। कार्यक्रम में संस्थान के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा आधुनिक कृषि तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर लाभान्वित हुए। साथ ही बड़ी संख्या में किसान भाइयों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बनाया। अंत में डॉ. आई. सी. ठाकुर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

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