इस अवसर पर समाजिक कार्यकर्ता इंदिरा जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने POSH Act के सामाजिक पहलुओं एवं इसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि समाज में सम्मान, समानता और सुरक्षा की भावना को मजबूत करना है। कॉलेज के प्राचार्य महोदय ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों, विशेषकर छात्र-छात्राओं के बीच पारस्परिक सम्मान एवं समझ विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में पुरुषों की विशेष जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं को सुरक्षित एवं सहज वातावरण प्रदान करें, जिससे वे बिना किसी भय के आगे बढ़ सकें। डॉ. अनामिका द्वारा POSH Act पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें उन्होंने अधिनियम के कानूनी प्रावधान, शिकायत प्रक्रिया तथा कार्यस्थल पर आचरण संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल एवं प्रभावी तरीके से समझाया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनुराधा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता में विजेता छात्र-छात्राओं—गौरव, लक्ष्मी एवं युवराज—को श्री मयंक कुमार सिंह द्वारा पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में छात्र समन्वयकों दीप्ती, सचिन, हिमांशु, अर्पित, प्रीति, अश्मिता आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा। कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।
दरभंगा (रजनीश के झा), 16 अप्रैल। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, दरभंगा में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के तत्वावधान में “POSH Act, 2013 (कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष)” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. सोनी सिंह ने अपने संबोधन में POSH Act के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण किसी भी संस्थान की मूल आवश्यकता है तथा इसके लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने का आह्वान किया।

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