मुक्तिबोध की डायरी पर उनके विनिबंध पर अपनी संस्तुति में डॉ सत्यनारायण व्यास ने कहा कि आधुनिक हिन्दी कविता के सबसे प्रमुख मुक्तिबोध की डायरी पर बाली का अध्ययन इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है कि यह कवि की रचना प्रक्रिया को व्यापकता और गहराई से विवेचित करता है। साथ ही रचना प्रक्रिया जैसे जटिल और गहन विषय पर भी युवा अध्येता का विश्लेषण उनके सामर्थ्य को उद्घाटित करता है कि आलोचना में उनकी रुचि कितनी गंभीर है। प्रो हाड़ा ने अपनी संस्तुति में कहा कि मुक्तिबोध अपनी रचना प्रक्रिया को लेकर हिंदी में सबसे अधिक सचेत साहित्यकार थे। उनकी साहित्यिक डायरी में उनकी रचना से संबंधित आत्म प्रक्रिया के मोड़-पड़ाव और द्वंद्व- तनाव साफ़ दिखाई पड़ते हैं। बाली का विनिबंध इनको समझने का सर्वथा नया उपक्रम है। डॉ हिमांशु पंड्या ने कहा कि अनूप बाली का आलेख गजानन माधव मुक्तिबोध के निबंध संग्रह ‘एक साहित्यिक की डायरी’ का सुदीर्घ विश्लेषण करते हुए उनके आत्मसंघर्ष के व्यापक राजनीतिक निहितार्थों को खोलता है। उन्होंने कहा कि बाली का अध्ययन और विश्लेषण मुक्तिबोध के आत्मसंघर्ष को अधिक समग्रता से हमारे सामने लाते हैं। ज्ञान, विचारधारा और वर्चस्व के अन्तर्सम्बन्धों का उनका विश्लेषण विचारोत्तेजक और नई बहस का उत्प्रेरक है। उक्त सम्मान के लिए परामर्श समिति के संयोजक और माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी कालेज, उदयपुर में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो मलय पानेरी ने बताया कि आलोचना के क्षेत्र में अपने अविस्मरणीय योगदान के लिए प्रो नवलकिशोर को जाना जाता है। उनकी स्मृति को स्थाई रखने के लिए यह सम्मान प्रारम्भ किया गया है जिससे देश भर के युवा अध्येताओं को भी नया मंच मिल सकेगा। पिछले दो वर्षों में यह सम्मान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, बनारस की निवेदिता प्रसाद और दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के असीम अग्रवाल को दिया जा चुका है।
नई दिल्ली (रजनीश के झा)। हिन्दी साहित्य और संस्कृति की पत्रिका बनास जन ने विख्यात आलोचक प्रो नवल किशोर की स्मृति में आलोचना सम्मान की घोषणा कर दी है। बनास जन द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि यह सम्मान इस वर्ष जामिया मिल्लिया इस्लामिया के युवा अध्येता डॉ अनूप कुमार बाली को उनके विनिबंध 'एक रचनाकार के आत्मसंघर्षों का रचनात्मक दस्तावेज़: एक साहित्यिक की डायरी और रचना-प्रक्रिया का प्रश्न' पर दिया जाएगा।सम्मान के लिए गठित निर्णायक समिति के सदस्यों डॉ सत्यनारायण व्यास (चित्तौड़गढ़), प्रो माधव हाड़ा (उदयपुर) और डॉ हिमांशु पंड्या (रानीवाड़ा) ने सर्वसम्मति से अनूप कुमार बाली की पांडुलिपि का चयन किया। बनास जन द्वारा उक्त विनिबंध का स्वतंत्र अंक के रूप में प्रकाशन किया जाएगा तथा सम्मान राशि भी भेंट की जाएगी। सम्प्रति दिल्ली के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया से हिंदी साहित्य में पीएचडी कर रहे डॉ अनूप कुमार बाली विषय में आंबेडकर विश्वविद्यालय से साहित्यिक कला पर पहली पीएचडी कर चुके हैं। बाली का जन्म 4 अक्टूबर 1990 को दिल्ली में हुआ था। दीनदयाल कालेज, दिल्ली से स्नातक तथा अम्बेडकर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर के बाद उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से पीएच.डी की उपाधि ग्रहण की।
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