पटना (रजनीश के झा), 24 अप्रैल। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर द्वारा 23 अप्रैल, 2026 को गया जिले के टेकारी प्रखंड अंतर्गत गुलेरियाचक गाँव में संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 46 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य में सुधार एवं टिकाऊ फसल उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को उनके खेतों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उचित एन:पी:के अनुपात में उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी। साथ ही फसल चक्र एवं फसल विविधीकरण अपनाने, विशेषकर वर्तमान फसल प्रणाली में दलहनी फसलों को शामिल करने पर जोर दिया गया। मृदा उर्वरता एवं उत्पादकता बनाए रखने हेतु ढैंचा एवं सनई जैसे हरी खाद फसलों के उपयोग, गोबर की खाद तथा जैव उर्वरकों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों ने सक्रिय रूप से अपनी समस्याएं एवं जिज्ञासाएं साझा कीं। किसानों ने सरकारी प्रयोगशालाओं में मृदा परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता व्यक्त की तथा ढैंचा एवं सनई के गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता की मांग की। साथ ही विभिन्न फसलों के लिए उपयुक्त उर्वरक मात्रा के संबंध में सुझाव भी मांगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अजय कुमार, डॉ. ज्योति कुमार, श्री पी. के. सिंह एवं अन्य कर्मचारियों की टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन किसानों से यह अपील करते हुए किया गया कि वे मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाएं, ताकि कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ स्थिरता भी सुनिश्चित की जा सके।
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
पटना : गया में संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
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