फूलों पर बैठी रहती,
रंग-बिरंगी होती तितली,
कितनी सुंदर होती तुम,
मैं भी तितली जैसी होती,
फूलों पर फिर बैठी रहती,
जिस फूल पर बैठे तितली,
उस फूल की माली तितली,
देख तितली मन खिल जाए,
हर बगिया में हरियाली छाए।।
हिमानी बिष्ट
कक्षा 8
सुराग, उत्तराखंड
टीम, गांव की आवाज

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