बताया जाता है कि दुर्गाली गांव से डिलीवरी के लिए आए मरीज को अनुमंडल अस्पताल से आशा एवं नर्स की मिलीभगत से गुमराह कर इस अवैध अस्पताल में लाया गया। वहां चिकित्सक के अनुपस्थित रहने के बावजूद परिजनों पर पैसा जमा कराने का दबाव बनाया गया। जब परिजनों ने मरीज की हालत बिगड़ती देख अन्य अस्पताल ले जाने की कोशिश की, तो उन्हें जबरन रोकने का प्रयास किया गया। संदेह होने पर परिजनों ने स्थानीय लोगों से जानकारी ली, जिसमें अस्पताल के अवैध होने का खुलासा हुआ। इसके बाद समाजसेवियों एवं आरटीआई कार्यकर्ताओं को सूचना दी गई, जिन्होंने तत्काल प्रशासन को अवगत कराया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान आरटीआई कार्यकर्ता त्रिलोक नाथ झा, वरिष्ठ समाजसेवी अभिषेक झा, मिश्री राम, सुमित बाबा सहित कई अन्य लोग भी मौजूद रहे। जांच के दौरान दो मरीज बरामद किए गए—एक पहले से सर्जरी कराए हुए और दूसरा डिलीवरी के लिए लाया गया। सभी मरीजों को सुरक्षित अनुमंडल अस्पताल में शिफ्ट किया गया। एसडीओ शारंग पाणी पाण्डेय ने स्पष्ट कहा कि किसी भी हालत में अवैध अस्पतालों को संचालित नहीं होने दिया जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अस्पताल को सील कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई के लिए कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बेनीपट्टी/मधुबनी, 25 अप्रैल : अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। बेनीपट्टी अनुमंडल अस्पताल रोड स्थित कृषि फार्म के समीप संचालित एम आर मरजेंसी हॉस्पिटल पर छापेमारी कर उसे सील कर दिया गया। मौके पर मौजूद दो सर्जरी एवं डिलीवरी मरीजों को तत्काल बेहतर इलाज के लिए अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह कार्रवाई अनुमंडल पदाधिकारी शारंग पाणी पाण्डेय, डीएसपी अमित कुमार एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पी. एन. झा के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ की गई। प्रशासनिक टीम के पहुंचते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कई कर्मी मौके से फरार हो गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त अस्पताल को पूर्व में ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध घोषित करते हुए दो लाख जुर्माना लगाया गया था और इसे बंद करने का आदेश भी जारी किया गया था। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी था।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें