स्थानीय सूत्रों और क्षेत्रीय निवासियों का आरोप है कि यह पूरा खेल विभागीय अधिकारियों और होटल संचालकों के बीच सांठगांठ से चल रहा है। मोटी रकम की वसूली के बाद इन अवैध निर्माणों को वैधता का जामा पहनाया जा रहा है। इससे न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा और जीवन स्तर पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि होम स्टे नीति का उद्देश्य छोटे स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को आय का साधन उपलब्ध कराना था, लेकिन पहाड़गंज में यह नीति बड़े पैमाने पर अवैध व्यवसायिक होटल संचालन के लिए दुरुपयोग का माध्यम बन गई है। नियमों के खिलाफ जाकर बड़ी संख्या में कमरों वाले होटल चलाना न केवल अवैध है, बल्कि इससे टैक्स चोरी और सुरक्षा जोखिम भी बढ़ जाते हैं।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी शिकायत की है कि इन अवैध होटलों में बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ने से अपराध की आशंका बनी रहती है। कई बार पुलिस और प्रशासन को भी सूचना दी गई, लेकिन कार्रवाई न के बराबर हुई है। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस मुद्दे पर जब संबंधित विभाग के अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। हालांकि, कुछ अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से स्वीकार किया कि जांच की आवश्यकता है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि क्या दिल्ली सरकार इस गंभीर मामले पर सख्त कदम उठाएगी या फिर यह भ्रष्टाचार का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा। पहाड़गंज जैसे संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के केंद्र में इस तरह की अनियमितताएं राजधानी की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके और आम जनता का भरोसा कायम रह सके।

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