सीहोर : आज भव्य कलश यात्रा के साथ आरंभ होगा प्राण-प्रतिष्ठा समारोह - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 18 अप्रैल 2026

सीहोर : आज भव्य कलश यात्रा के साथ आरंभ होगा प्राण-प्रतिष्ठा समारोह

  • श्रीराम यज्ञ में दो दर्जन से अधिक विप्रजन देंगे आहुतियां, राम राज्य की कल्पना को आज भी आदर्श माना जाता : यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे

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सीहोर। मानव, मर्यादा का पालन कर अन्याय के विरूद्ध लड़ सकता है, यही शिक्षा राम के चरित्र को सभी में उत्तम बनाती है। राम राज्य की कल्पना को आज भी आदर्श माना जाता है, राम राज्य और श्रीराम का राजधर्म पूर्णत: सत्य और धर्म पर आधारित है। उक्त विचार यज्ञ संचालक श्री-श्री पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे ने शहर के जयंती कालोनी में बालाजी सरकार श्री हनुमान मंदिर समिति के तत्वाधान में रविवार से होने वाले भव्य श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्रीराम कथा में आए विप्रजनों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहाकि यह पल सीहोर शहर के इतिहास में पहली बार आने वाला है, जब राष्ट्रीय राम कथा व्यास मानस कोकिला महंत डॉ. प्रज्ञा भारती के द्वारा श्रीराम कथा और रात्रि को महाकाल मंडल रामलीला उज्जैन द्वारा प्रतिदिन मंचन किया जाएगा। लगातार सात दिनों तक भगवान की महिमा का महत्व बताया जाएगा। इसके अलावा मानस सम्मेलन में प्राचीन श्री हंसदास मठ श्री हरिरामदास महाराज, त्यागी बाबा आश्रम के उद्ववदास महाराज अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित श्री प्रदीप मिश्रा के अलावा शहर के अनेक कथा वाचकों के द्वारा यहां पर नियमित प्रवचन का आयोजन किया जाएगा।


प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के अध्यक्ष रुद्रप्रकाश राठौर, मंदिर के पुजारी अनिल शर्मा, यज्ञचार्य पंडित दीपक शास्त्री आदि द्वारा किया जा रहा है। रविवार को दोपहर तीन बजे शहर के जगदीश मंदिर से कलश यात्रा निकाली जाएगी जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए हनुमान मंदिर स्थित यज्ञ शाला पहुंचेगी। इससे पहले पंचाग पूजन, मंडल प्रवेश, जलाधिवास, राम रक्षा स्त्रों एवं हनुमान चालीसा पाठ के अलावा अन्य दिव्य आयोजन किए जाऐंगे। श्री-श्री 108 पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे ने बताया कि मानस सम्मेल का आयोजन भव्य रूप से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भगवान राम के कार्य में शहरी और ग्रामीण जन उपस्थित होकर धर्म लाभ ले। भगवान राम का अनुपम चरित्र प्रत्येक कालखंड में अनुकरणीय है। त्रेता युग में जन्मे राम की महिमा का गुणगान कलयुग में करने से राम भक्त भविष्य में आने वाली हर विघ्न-बाधा को सफलतापूर्वक पार कर लेते हैं। मर्यादा में रहकर भवसागर से कैसे करना है, इसका उदाहरण राम चरित्र में मिलता है, फिर वह चाहें एक पुत्र की मर्यादा हो अथवा भाई की मर्यादा, पति की मर्यादा, क्षत्रिय धर्म की मर्यादा, मानवीय मूल्यों की मर्यादा, राजा की मर्यादा इत्यादि, सभी मर्यादाओं का पालन विषम परिस्थितियों में श्री राम जी ने कष्टों को सहते हुए किया। त्रेतायुग से लेकर कलियुग में आज भी श्री राम की मर्यादा सभी के लिए प्रासंगिक है।

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