- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में आज से होगा इस महानाट्य का शुभारंभ
- विक्रमोत्सव-2026 में बीएलडब्ल्यू मैदान बनेगा प्राचीन भारत का मंच, आतिशबाजी के बीच सजेगा इतिहास, तीन दिन चलेगा भव्य महानाट्य, दिखेगा शौर्य, धर्म और सुशासन
जब मंच पर जीवित होगा इतिहास
बीएलडब्ल्यू मैदान में तैयार किए जा रहे तीन भव्य मंच इस आयोजन की विराटता के साक्षी बनेंगे। केंद्र में विशाल मुख्य मंच और दोनों ओर सहायक मंचों पर सिंहासन बत्तीसी, बेताल पच्चीसी और भविष्य पुराण के प्रसंगों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के अद्वितीय व्यक्तित्व को उकेरा जाएगा। यह प्रस्तुति केवल कथा नहीं, बल्कि एक युग का पुनर्सृजन है—जहाँ न्याय केवल शब्द नहीं, शासन का आधार था; जहाँ ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति अपने उत्कर्ष पर थे। नवरत्नों की विद्वता, दरबार की गरिमा और राजा के निर्णयों की निष्पक्षता—सब कुछ दर्शकों के सामने सजीव होगा।
हाथी-घोड़े, रथ और रोशनी में सजेगा वैभव
इस महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जीवंतता है। 200 से अधिक कलाकारों के साथ 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊँट, 1 पालकी और 1 हाथी मंच पर उतरेंगे। युद्ध दृश्य, राजदरबार, धार्मिक अनुष्ठान और लोकजीवन—हर दृश्य वास्तविकता का आभास कराएगा। 400 से अधिक आधुनिक लाइट्स, विशाल एलईडी स्क्रीन और भव्य आतिशबाजी इस आयोजन को दृश्यात्मक रूप से अद्वितीय बनाएगी। दर्शक केवल नाटक नहीं देखेंगे, बल्कि एक युग को जीएंगे।
महाकाल से काशी तक—आस्था का सेतु
लेफ्ट मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की भव्य प्रतिकृति और शिवलिंग पर भस्म आरती का दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगा। यह आयोजन केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का संगम भी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा बाबा विश्वनाथ को ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अर्पण किया जाएगा। यह घड़ी भारतीय कालगणना की प्राचीन परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है, जो समय को सूर्योदय आधारित वैदिक प्रणाली से जोड़ती है।
सांस्कृतिक एकता और जागरण का संदेश
काशी में मध्य प्रदेश के कलाकारों द्वारा इस महानाट्य का मंचन केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि उत्तर और मध्य भारत के सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक है। यह आयोजन उस भारत की झलक दिखाता है, जहाँ विविधता में एकता केवल विचार नहीं, जीवन शैली थी। सम्राट विक्रमादित्य का चरित्र आज भी उतना ही प्रासंगिक है—न्यायप्रियता, प्रजा के प्रति समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक। यह महानाट्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और गौरव का बोध कराने का माध्यम बन रहा है।
शहर में उत्साह, उमड़ रही भीड़
बीएलडब्ल्यू मैदान में चल रही तैयारियों और रिहर्सल को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। वाराणसी के नागरिकों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह है और 3 से 5 अप्रैल तक चलने वाले इस महानाट्य को देखने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। काशी की पावन धरती पर ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और आत्मगौरव का पुनर्पाठ है। यह वह क्षण है, जब अतीत वर्तमान के मंच पर उतरकर भविष्य को दिशा देता है—और काशी, एक बार फिर उस गौरवगाथा की साक्षी बनने को तैयार है।

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