निर्देशों के अनुसार विद्यालय द्वारा निर्धारित सभी प्रकार के शुल्क (प्रवेश, पुनः नामांकन, विकास, मासिक, वार्षिक आदि) की जानकारी विद्यालय के सूचना पट्ट एवं वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। पुस्तकों, ड्रेस एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री की सूची भी सार्वजनिक की जाएगी। अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा; वे अपनी सुविधा अनुसार कहीं से भी खरीद सकते हैं। विद्यालयों द्वारा हर वर्ष यूनिफॉर्म बदलने जैसी अनावश्यक प्रथाओं से बचा जाएगा। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विद्यालय इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के अनुपालन की निगरानी अनुमंडल स्तर पर संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी तथा जिला स्तर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
मधुबनी (रजनीश के झा)। 09 अप्रैल। जिलाधिकारी, आनंद शर्मा ने अपने एक आदेश में कहा है कि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों में यह बात आई है कि जिले के कुछ निजी विद्यालयों में नामांकन के दौरान छात्रों एवं अभिभावकों से पुनः नामांकन, ड्रेस, पुस्तक, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क आदि के नाम पर अत्यधिक एवं अनियमित राशि वसूली की जा रही है। साथ ही विद्यालयों द्वारा यूनिफॉर्म, पुस्तक एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री के लिए निर्धारित दुकानों से ही खरीद करने हेतु अभिभावकों को बाध्य किया जा रहा है। इस पर गंभीर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि यह प्रवृत्ति शिक्षा के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देती है, जो अत्यंत चिंताजनक एवं आपत्तिजनक है। इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाधिकारी ने जिले के सभी निजी विद्यालयों के संचालकों को निर्देशित किया है कि वे शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, बिहार विद्यालय परिवहन संचालन विनियमन, 2020, बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019 नियमों एवं अधिनियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे.

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